‘एक राष्ट्र, एक कानून’ जरूरी : डॉ. रावत
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‘एक राष्ट्र, एक कानून’ जरूरी : डॉ. रावत
उदयपुर सांसद ने धर्मांतरण रोकने संसद में उठाई मांग, बोले— सुनियोजित साजिश बन चुका है धर्मांतरण, देश की एकता के लिए गंभीर खतरा
उदयपुर। 29 जुलाई
सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने मंगलवार को संसद में नियम 377 के तहत देशभर में तेजी से फैल रही अवैध धर्मांतरण गतिविधियों पर चिंता जताई। उन्होंने धर्मांतरण को एक सुनियोजित साजिश बताते हुए इसके खिलाफ सख्त केंद्रीय कानून बनाने की मांग की।
कहा—धर्मांतरण गैंग भारत की सांस्कृतिक पहचान पर हमला
सांसद डॉ. रावत ने कहा कि देश के कई हिस्सों में अवैध धर्मांतरण एक उद्योग के रूप में चल रहा है। यह भारत की सांस्कृतिक जड़ों को तोड़ने और राष्ट्रविरोधी एजेंडे को बढ़ावा देने की साजिश है। उन्होंने इसे “कल्चरल जेनोसाइड” बताते हुए कहा कि यह राष्ट्र की अस्मिता और सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बन चुका है।
छांगुर बाबा जैसे मामले इस साजिश के प्रमाण
उन्होंने उदाहरण देते हुए छांगुर बाबा प्रकरण का जिक्र किया और कहा कि ऐसे लोग संगठित गिरोह बनाकर सैकड़ों हिंदू युवतियों का धर्मांतरण कर चुके हैं। यह मामला स्पष्ट करता है कि धर्मांतरण गैंग कैसे कट्टरपंथी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
12 राज्यों में कमजोर कानून, 16 राज्यों में अब तक कोई नियम नहीं
सांसद ने बताया कि वर्तमान में केवल 12 राज्यों में ही धर्मांतरण पर कानून हैं, वो भी कमजोर हैं। जबकि 16 राज्यों में अब तक कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। कई राज्य इस गंभीर विषय पर राजनीतिक कारणों से चुप हैं।
आदिवासी क्षेत्रों को बनाया जा रहा निशाना
डॉ. रावत ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में नकद प्रलोभन और अन्य तरीकों से धर्मांतरण की कोशिश हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यह गतिविधियां स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण के चलते अब भी सक्रिय हैं।
मांग—राष्ट्रीय स्तर पर सख्त कानून बने
सांसद डॉ. रावत ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ की तर्ज पर अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए एक सशक्त केंद्रीय कानून संसद में लाया जाए, जिससे इस राष्ट्रीय संकट का समाधान संभव हो सके।
