कभी मजदूरी, कभी चौकी पर खाना बनाया… संघर्षों से बने SI दिनेश, अब भर्ती रद्द होने से टूटी उम्मीदें
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गरीबी से जूझते परिवार पर संकट; पिता बीमार, मां मेहनतकश, भाई-बहनों की जिम्मेदारी अकेले उठाते रहे
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 3 सितम्बर
जिले के संचिया गांव के दिनेश वरहात ने गरीबी और जिम्मेदारियों के बीच संघर्षों से सफर तय किया। मजदूरी, होटल में काम और पुलिस चौकी पर खाना बनाने जैसे कार्य किए, लेकिन सपना हमेशा एक ही रहा—पुलिस की वर्दी पहनना। 2021 की एसआई भर्ती में चयन होने पर परिवार को उम्मीद जगी थी कि अब जिंदगी बदल जाएगी, मगर हाईकोर्ट के फैसले ने सारी उम्मीदें तोड़ दीं।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर डूंगरपुर के एसबीपी कॉलेज से स्नातक करने वाले दिनेश ने हालात से हार नहीं मानी। गुजरात में मजदूरी और कोरोना काल में चौकी पर रसोई का काम करते हुए भी तैयारी जारी रखी।
कई नौकरियों में चयन, पर लक्ष्य एसआई
दिनेश का चयन कांस्टेबल, पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी और वनपाल जैसे पदों पर हुआ। पटवारी पद पर 16 माह सेवा देने के बावजूद उन्होंने स्थायी नौकरी छोड़ दी और एसआई भर्ती की तैयारी करते रहे।
समाज को भी संवारा
दिनेश ने आदिवासी छात्रावास में तीन साल तक बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाया। उनके पढ़ाए 100 से अधिक बच्चे आज सरकारी सेवाओं में हैं, जिनमें 40 पुलिस विभाग में कार्यरत हैं।
परिवार की निराशा
बीमार पिता, मेहनतकश मां और पांच भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठाने वाले दिनेश पर ही परिवार की उम्मीदें टिकी थीं। मां शारदा कहती हैं—“लगा था बेटे की नौकरी से घर बस जाएगा, मगर अब सब अधूरा है।”
भर्ती रद्द होने से आक्रोश
2021 की एसआई भर्ती रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत पर पानी फिर गया। दिनेश जैसे युवाओं का कहना है कि गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई हो, लेकिन ईमानदारी से चयनित उम्मीदवारों को सजा देना अन्याय है। अब सभी की निगाहें सरकार और अदालत पर टिकी हैं।
