‘गोयरा’ को लेकर फैली भ्रांतियां तोड़ने के लिए रेंजर ने खुद को कटवाया
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‘गोयरा’ को लेकर फैली भ्रांतियां तोड़ने के लिए रेंजर ने खुद को कटवाया
कहा- यह न जहरीला है, न जानलेवा
उदयपुर। 31 जुलाई
चित्तौड़गढ़ जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में ‘गोयरा’ (मॉनिटर लिजर्ड) को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए धरियावद के रेंजर प्रशांत शर्मा ने अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने खुद को गोयरे से कटवाया और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया ताकि यह साबित हो सके कि यह जीव न तो जहरीला है और न ही जानलेवा।
प्रशांत शर्मा ने बताया कि चार साल के इस गोयरे के काटने के बाद न कोई सूजन हुई और न ही विष का असर। उनका मकसद था कि लोग अंधविश्वास के चलते ऐसे उपयोगी जीवों को न मारें। उन्होंने बताया कि मॉनिटर लिजर्ड बेहद शांत और शर्मीला होता है, यह इंसानों से बचने की कोशिश करता है, हमला नहीं करता।
गोयरे को लेकर सबसे बड़ा मिथक है कि इसके काटने से इंसान की तुरंत मौत हो जाती है। जबकि एक्सपर्ट्स और पशु चिकित्सकों के अनुसार, इसमें कोई जहर नहीं होता। वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. धर्मेंद्र कुमार सोन ने कहा कि गोयरे से मौत नहीं होती, बस इसकी त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया से स्किन इन्फेक्शन हो सकता है।
इतिहास में भी इस जीव का जिक्र मिलता है। छत्रपति शिवाजी के सेनापति तानाजी मालुसरे ‘यशवंती’ नाम की गोह के सहारे किलों पर चढ़ते थे। इसका दीवार पकड़ने का तरीका बेहद मजबूत होता है और यह करीब 1 क्विंटल वजन खींच सकती है।
बारिश में जब इनके बिलों में पानी भर जाता है तो ये रिहायशी इलाकों में आ जाते हैं। मॉनिटर लिजर्ड 10 से 15 साल तक जीवित रहते हैं और एक बार में 10 से 30 अंडे देते हैं। ये कीड़े-मकोड़े, अंडे और सड़ा मांस खाते हैं।
रेंजर शर्मा ने बताया कि उन्हें यह जागरूकता वीडियो एक बंदर की सड़क हादसे में मौत से प्रेरित होकर बनाने का विचार आया था। पहले उन्होंने बंदरों को लेकर वीडियो बनाया, फिर गोयरे पर भी वीडियो बनाकर वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की कोशिश की।
