जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं बच्चे
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जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं बच्चे
बरसात में हालात और बिगड़ते हैं, नदी पार कर पढ़ने जाना मजबूरी
उदयपुर। 30 जुलाई
डूंगरपुर जिले की झोथरी पंचायत समिति के ग्राम पंचायत रेटा के कुंडली फला में ससरन की नाल नामक नदी के बीच से होकर बच्चे स्कूल जाने को मजबूर हैं। बारिश में नदी उफान पर बहती है, लेकिन इसके बावजूद बच्चे जान जोखिम में डालकर ढाई किलोमीटर लंबा पथरीला और कंटीला रास्ता पार कर स्कूल पहुंचते हैं।
नदी में जहरीले जानवरों का खतरा रहता है और पानी 3 से 5 फीट तक भर जाता है। बच्चे बताते हैं कि नदी पार करते वक्त बस्ते भीग जाते हैं, किताबें खराब हो जाती हैं और कपड़ों में कीचड़ लग जाता है। कई बार तेज बहाव के चलते स्कूल नहीं जा पाते, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
ससरन की नाल के एक छोर पर 5वीं तक का प्राइमरी स्कूल है, जबकि आगे की पढ़ाई के लिए कुंडली अपर प्राइमरी स्कूल जाना पड़ता है, जो नदी के दूसरे छोर पर स्थित है। रोजाना 7–8 बच्चे प्राइमरी स्कूल और 10–15 बच्चे अपर प्राइमरी स्कूल पढ़ने जाते हैं।
नदी पार करने के बाद बच्चों को खेतों और कंटीली झाड़ियों के बीच से गुजरना पड़ता है, जो बारिश में फिसलन भरा और खतरनाक हो जाता है।
प्राथमिक स्कूल के शिक्षक भी इसी रास्ते से स्कूल पहुंचते हैं। एक शिक्षक बाइक नदी में खड़ी कर पैदल स्कूल जाते हैं। शिक्षिका लीला बच्चों को साथ लेकर आती-जाती हैं ताकि कोई हादसा न हो। ग्रामीणों के अनुसार, ढाई किमी लंबी नदी पर पुलिया संभव नहीं, लेकिन अगर खेत मालिक कुछ जमीन दें तो सड़क व पुल का निर्माण किया जा सकता है।
