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बेगूं जैन किला मंदिर विवाद में बड़ा फैसला

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बेगूं जैन किला मंदिर विवाद में बड़ा फैसला

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25 साल पुरानी ट्रस्ट डीड रद्द, दो माह में होंगे चुनाव

उदयपुर। 13 अगस्त
चित्तौड़गढ़ जिले में बेगूं एडीजे कोर्ट के न्यायाधीश नीरज कुमार ने 25 साल पुराने जैन किला मंदिर विवाद में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पारस कुमार जैन और अन्य द्वारा बनाई गई ट्रस्ट डीड को निरस्त कर दिया है। साथ ही, मंदिर के लिए दो माह में आम चुनाव कराने और व्यवस्थापक नियुक्त करने के आदेश दिए हैं।
मंदिर संपत्ति पूर्व स्थिति में लाने के निर्देश
वादियों भागचंद टोंग्या और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने ट्रस्ट डीड के तहत मंदिर की संपत्ति पर किए गए कब्जे को पूर्व की स्थिति में लाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि दो माह में चुनाव नहीं होते हैं, तो बेगूं एसडीएम के संरक्षण में मंदिर की पूजा व्यवस्था करवाई जाएगी।
25 वर्षों से रुका निर्माण कार्य
चित्तौड़गढ़ जिले के इस सबसे पुराने मामले में पिछले 25 वर्षों से मंदिर का निर्माण कार्य रुका हुआ है। इस दौरान कलेक्टर, एसपी, विधानसभा अध्यक्ष और जैन मुनियों ने कई बार सुलह का प्रयास किया, लेकिन समाज में अलग-अलग मान्यताओं के कारण समाधान नहीं निकल सका।
यह है मामला
साल 2001 में बेगूं किला स्थित जैन मंदिर में जीर्णोद्धार और पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान मूर्ति स्थापना को लेकर समाज के दो पक्षों में विवाद हो गया था। इस दौरान झगड़ा और मारपीट की घटना हुई, जिसके बाद निर्माण कार्य अधूरा रह गया। मंदिर की पूजा व्यवस्था पहले भागचंद टोंग्या के जिम्मे थी। विवाद के बाद नई व्यवस्था के लिए पारस कुमार जैन समेत 36 लोगों ने ट्रस्ट डीड बनाई। इसके खिलाफ भागचंद ने बेगूं एसीजेएम कोर्ट में प्रकरण दर्ज कराया, जिस पर प्रसंज्ञान लिया गया। बाद में प्रतिवादियों ने इस मामले में हाईकोर्ट में अपील की।
कई वादी-प्रतिवादी अब नहीं रहे
इस मामले में कुल 14 वादी थे, जिनमें से 4 की मृत्यु हो चुकी है और 4 के नाम प्रकरण से हटा दिए गए। वहीं, 36 प्रतिवादियों में से 9 की मृत्यु हो जाने के कारण उनके नाम अबेट कर दिए गए। भागचंद टोंग्या की ओर से एडवोकेट भोलेश भट्ट, एतमाद अजमेरी, सोहीद और संकल्प भट्ट ने पैरवी की।

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