लुटेरी करिश्मा और विस्फोट में मरे श्रमिक का राज बरकरार
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नाकामी: एक साल बाद भी उदयपुर पुलिस दोनों ही मामले में खाली हाथ
उदयपुर। 11 अगस्त
शहर के सबसिटी सेंटर में एक वर्ष पूर्व हुए भीषण विस्फोट में मारे गए अज्ञात श्रमिक और भुवाणा में नशीला खाना खिलाकर लूट की वारदात को अंजाम देने वाली नेपाली नौकरानी करिश्मा का पुलिस अब तक कोई सुराग नहीं लगा पाई है। दोनों मामलों की जांच फाइलों में अटकी पड़ी है।
11 जून 2023 को रेती स्टैंड स्थित सबसिटी सेंटर में एक आर्म्स की दुकान में हुए धमाके में दुकान मालिक आशीर्वाद नगर निवासी राजेंद्र देवपुरा और एक श्रमिक की मौके पर ही मौत हो गई थी। विस्फोट इतना भयानक था कि दोनों के चिथड़े उड़ गए। देवपुरा की पहचान उनके व्यवसाय के आधार पर हो गई, लेकिन श्रमिक की पहचान आज तक नहीं हो पाई। पुलिस और एफएसएल टीम ने साक्ष्य जुटाए, प्रदेशभर में सूचना प्रसारित की, पर किसी ने गुमशुदगी का दावा नहीं किया। दुकान का लाइसेंस दिसंबर 2023 में ही समाप्त हो चुका था, इसके बावजूद वहां विस्फोटक का संग्रह और उपयोग जारी था। पहचान न होने पर पुलिस ने शव के टुकड़ों का पोस्टमार्टम कराकर संस्था के सहयोग से अंत्येष्टि कर दी।
दूसरी ओर, 8 जुलाई 2024 की रात भुवाणा के मॉडर्न कॉम्प्लेक्स में रहने वाली शिल्पा गांधी और उनके परिवार को उनकी नेपाली नौकरानी करिश्मा ने नशीला खाना खिलाकर बेहोश कर दिया और अपने साथियों के साथ लूट कर फरार हो गई। पुलिस ने नेपाल से जुड़े तारों का खुलासा करते हुए 15 दिनों में तीन आरोपियों को पकड़ा, जिनमें मुख्य आरोपी वीरबहादुर उर्फ बलबहादुर मेरठ में सात करोड़ की लूट का मास्टरमाइंड और ₹5 लाख का इनामी बदमाश था।
वारदात के बाद करिश्मा नेपाल भाग गई। चूंकि भारत और नेपाल के बीच आरोपियों को लाने की संधि नहीं है, पुलिस उसे सीमा पार से गिरफ्तार नहीं कर पाई। नेपाल पुलिस को सूचना दी जा चुकी है। जांच में सामने आया कि लूट में शामिल बदमाश पेशेवर अपराधी हैं, जो एक वारदात के तुरंत बाद दूसरी की योजना बनाते हैं। वे नेपाल के धनगढ़ी, डोटी और महेंद्रनगर जिलों के रहने वाले हैं।
नेपाल की कुख्यात अपराधी है करिश्मा
करिश्मा, जिसे लक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है, नेपाल की कुख्यात अपराधी है। वह जूडो-कराटे में ब्लैक बेल्टधारी है और पुरुषों की तरह बलपूर्वक अपराध करने में सक्षम है। पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों में प्रयास जारी हैं, लेकिन एक में अज्ञात मृतक की पहचान और दूसरे में सीमा पार आरोपी की गिरफ्तारी अब भी चुनौती बनी हुई है।
