राजस्थान के 18% पेंशनधारियों की पेंशन अटकने का संकट
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31 जनवरी तक सिर्फ 82% सत्यापन पूरा, 16.35 लाख पेंशनर्स अभी भी लंबित
उदयपुर, 8 फरवरी (सुभाष शर्मा): राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से जुड़े लाखों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए चिंता बढ़ गई है। वार्षिक भौतिक सत्यापन प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने के कारण प्रदेश के करीब 18 प्रतिशत पेंशनधारियों की पेंशन रुकने का खतरा मंडरा रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 91,68,997 पेंशनर्स हैं, जिनमें से केवल 75,33,228 (82.16%) का ही सत्यापन 31 जनवरी तक हो सका है। वहीं 16,35,769 पेंशनधारियों का सत्यापन अभी भी शेष है।
फरवरी के बाद पेंशन रुकने की आशंका
सरकार ने सत्यापन की अंतिम तिथि पहले 31 दिसंबर तय की थी, लेकिन बड़ी संख्या में लंबित मामलों को देखते हुए इसे बढ़ाकर 31 जनवरी कर दिया गया। इसके बावजूद लाखों पेंशनधारियों ने प्रक्रिया पूरी नहीं कराई। विभाग ने संकेत दिए हैं कि ऐसे लाभार्थियों को फरवरी में पेंशन मिल सकती है, लेकिन मार्च से भुगतान रोका जा सकता है।
सत्यापन में ये जिले सबसे पीछे
खैरथल-तिजारा: 1,09,614 में 87,262 (79.61%)
चित्तौड़गढ़: 2,58,887 में 2,05,863 (79.52%)
डीडवाना-कूचामन: 2,21,332 में 1,75,987 (79.51%)
सिरोही: 1,45,016 में 1,14,836 (79.19%)
जोधपुर: 3,43,393 में 2,71,431 (79.04%)
सवाई माधोपुर: 1,70,671 में 1,31,810 (77.23%)
प्रतापगढ़: 1,32,560 में 1,02,330 (77.20%)
नागौर: 2,60,405 में 1,98,725 (76.31%)
जयपुर: 6,12,038 में 4,60,752 (75.28%)
जालौर: 2,79,666 में 2,10,464 (75.26%)
चित्तौड़गढ़ 2,59,449 में 2,09,076 (80.81%)
उदयपुर 1,93,111 में 1,65,592 (80.81%)
जयपुर में सबसे ज्यादा लापरवाही
राजधानी जयपुर में करीब 1.51 लाख पेंशनर्स ने अब तक सत्यापन नहीं कराया है। इनमें बड़ी संख्या 75 वर्ष से कम आयु के पेंशनधारियों की है।
जागरूकता का अभाव
विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्ग, दिव्यांग और ग्रामीण क्षेत्रों के लाभार्थियों में जागरूकता की कमी सत्यापन में देरी का मुख्य कारण है। विभाग ने ई-मित्र, मोबाइल ऐप और फेस रिकग्निशन जैसी सुविधाओं के जरिए सत्यापन कराने की अपील की है। इधर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग उदयपुर के संयुक्त निदेशक गिरीश भटनागर का कहना है कि विभाग द्वारा लगभग अस्सी फीसदी लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन हो चुका है। 31 जनवरी अंतिम तिथि थी।
