किशोरी से दुष्कर्म के नाबालिग आरोपी को 20 वर्ष की कैद
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किशोरी से दुष्कर्म के नाबालिग आरोपी को 20 वर्ष की कैद
पोक्सो कोर्ट ने सुनाया फैसला
उदयपुर, 2 अगस्त
विशेष न्यायालय लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 बांसवाड़ा की न्यायाधीश तारा अग्रवाल ने किशोरी से जबरन दुष्कर्म करने के एक नाबालिग आरोपी को 20 वर्ष के कठोर करावास से दंडित किया है। न्यायालय ने आरोपी पर 20 हजार रुपए का जुर्माना भी किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पांच वर्ष पहले 14 जुलाई 2020 को पीड़िता ने बताया कि माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है। कोई भाई-बहिन नहीं हैं। उसका पालन-पोषण उसके चाचा और चाची करते हैं। चाचा-चाची कोटा शहर में रेलवे स्टेशन के पास मजदूरी करते थे और वहीं रहते थे। मजदूरी के दौरान वह अपने तीन चचेरे भाई-बहिनों की देखभाल और रखवाली करती थी। कोटा में ही उसके मामा के बेटे की पत्नी भी मजदूरी करती थी। रिपोर्ट के अनुसार कोरोना काल में अप्रेल में लॉकडाउन लगने पर ममेरे भाई की पत्नी ने गांव चलने को कहा। उसके साथ दो अन्य जने भी थे, जिन्हें रिश्तेदार बताया गया। कोटा से वे बांसवाड़ा आए और बोकड़ाबोर गांव ले गए। वहां ममेरे भाई की पत्नी ने साथ आए एक युवक की पत्नी बनकर रहने की बात कही। साथ ही उसे दूसरे से उसकी पत्नी बनकर रहने को कहा। मना करने पर भी उसे नाबालिग लड़के की पत्नी बनाकर रखा। इस दौरान उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया। 12 जुलाई को मौका पाकर वह बोकड़ाबोर गांव से भाग निकली।
वनकर्मी ने की मदद
गांव से भागने के बाद जंगल से होकर जाने के दौरान उसे वनकर्मी गांगजी मिला। पीड़िता ने अपने मामा के घर जाने की बात कही। शाम होने के कारण वनकर्मी उसे अपने घर ले गया। खाना खिलाया और रात को वहीं रखा। 13 जुलाई को गांगजी उसे लेकर दानपुर थाने जा रहा था। रास्ते में एक हैड कांस्टेबल के मिलने पर चाइल्ड हेल्पलाइन पर बात की तो उसे बांसवाड़ा ले जाने को कहा। इसके बाद पुलिसकर्मी उसे राजकीय कन्या छात्रावास लाए। पीड़िता के बयान पर दानपुर थाना पुलिस ने पोक्सो एक्ट सहित अपहरण और दुष्कर्म की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया। अनुसंधान के बाद आरोपी को डिटेन कर उसके खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड में आरोप पत्र पेश किया। न्यायालय द्वारा प्रकरण में प्रसंज्ञान लेने पर पत्रावली पोक्सो कोर्ट में अंतरित की गई।
कोर्ट ने यह दिया आदेश
विशिष्ट लोक अभियोजक हेमेन्द्रनाथ पुरोहित ने बताया कि न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद नाबालिग आरोपी को दोषी माना। न्यायालय ने भादंसं की धारा 363 के तहत 3 वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपए जुर्माना, धारा 366 के तहत 4 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माना, धारा 344 के तहत 2 वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपए जुर्माना तथा पोक्सो एक्ट के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा 20 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को एक वर्ष का कारावास अतिरिक्त भुगताने के आदेश दिए।
