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धोलावीरा की धरती से निकल रही है हड़प्पाई धातु कला की अनकही कहानी

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धोलावीरा की धरती से निकल रही है हड़प्पाई धातु कला की अनकही कहानी

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उदयपुर की शोधार्थी आस्था शर्मा ने वैज्ञानिक अध्ययन से खोले नए राज

सुभाष शर्मा
उदयपुर, 27 सितम्बर
: हड़प्पा सभ्यता (2600–1900 ईसा पूर्व) को दक्षिण एशिया की सबसे प्राचीन नगरीय सभ्यताओं में गिना जाता है। मोहनजोदड़ो, राखीगढ़ी और हड़प्पा जैसे प्रमुख स्थलों के साथ धोलावीरा भी लंबे समय से चर्चा का केंद्र रहा है। हालांकि तांबा-कांस्य धातु कला की मूल प्रक्रिया अब तक रहस्य में ही रही थी।
इसी कड़ी में उदयपुर की आस्था शर्मा, जो इजरायल की एरियल यूनिवर्सिटी में शोधार्थी हैं, ने अपनी टीम के साथ चीन के ग्वांगझोउ शहर में चल रही अंतरराष्ट्रीय सेमीनार में पहली बार इसका बड़ा खुलासा किया है। उनकी टीम में आईआईटी गांधीनगर के वी.एन. प्रभाकर और एरियल यूनिवर्सिटी के प्रो. अदी एलियाहु-बेहार भी शामिल थे। शोध का मुख्य उद्देश्य हड़प्पाई लोगों के उस काल में तांबा-कांस्य जैसी मिश्रित धातुओं का निर्माण को लेकर भी था।
क्या मिला शोध में?
टीम ने धातुक अवशेषों का आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से विश्लेषण किया।
पोर्टेबल एक्स-रे फ्लोरेसेंस (PXRF) से प्रारंभिक संरचना की पहचान।
ऑप्टिकल माइक्रोस्कोपी और SEM-EDS से सूक्ष्म संरचना का अध्ययन।

FTIR तकनीक से खनिजीय अवयवों की पड़ताल।
इन जांचों से यह सामने आया कि धोलावीरा में स्मेल्टिंग स्लैग, मैट, इनगट और टिन मिश्र धातु के संकेत मिले हैं। सबसे अहम खोज यह रही कि कैसिटराइट (टिन अयस्क) के अंश मिले, जो दर्शाते हैं कि यहां जानबूझकर टिन मिलाकर कांस्य तैयार किया जाता था।

प्राथमिक स्मेल्टिंग नहीं, परिशोधन का केंद्र
शोधकर्ताओं के अनुसार धोलावीरा में प्राथमिक स्मेल्टिंग (अयस्क से सीधा धातु निकालना) के प्रमाण नहीं मिले। लेकिन स्लैग और इनगट के साथ मिले अवशेष यह संकेत देते हैं कि यहां धातु परिशोधन (refining) और टिन मिश्रण (alloying) की गतिविधियां होती थीं। यह निष्कर्ष हड़प्पाई तकनीक की उन्नत समझ को दर्शाता है।

क्यों है यह शोध महत्वपूर्ण?
यह अध्ययन हरप्पाई धातु कला से जुड़े सीमित वैज्ञानिक आंकड़ों को समृद्ध करता है और धौलावीरा की धातु गतिविधियों को लेकर नई जानकारियां उजागर करता है। शोध टीम वर्तमान में लीड आइसोटोप एनालिसिस (LIA) भी कर रही है, जिससे यह पता लगाया जाएगा कि तांबे का स्रोत कहां था और हड़प्पाई व्यापारिक नेटवर्क कितनी दूर तक फैले थे।

उदयपुर की भूमिका
इस अध्ययन में उदयपुर की आस्था शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी अगुवाई में हुई इस खोज ने धौलावीरा की धातु कला को नई पहचान दिलाई है और यह साबित किया है कि हड़प्पाई सभ्यता धातु प्रौद्योगिकी में काफी उन्नत थी।

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