मेवाड़ राजपरिवार का संपत्ति विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
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अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को दी चुनौती, सिटी पैलेस व एचआरएच ग्रुप पर अधिकार का मामला
उदयपुर, 18 दिसम्बर: उदयपुर के पूर्व राजपरिवार में दशकों से चला आ रहा संपत्ति विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। पूर्व महाराणा अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को चुनौती देते हुए दायर याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। यह विवाद अरविंद सिंह मेवाड़ के पुत्र लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और पुत्री पद्मजा कुमारी परमार के बीच सिटी पैलेस, एचआरएच होटल्स ग्रुप सहित अन्य बहुमूल्य संपत्तियों के अधिकार को लेकर है।
दिल्ली हाईकोर्ट में होगी अब सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले से जुड़े सभी मुकदमों को दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया है। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 11 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में होगी। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ वर्तमान में मेवाड़ राजपरिवार के उत्तराधिकारी और एचआरएच ग्रुप ऑफ होटल्स के प्रमुख हैं।
दोनों पक्षों की अलग-अलग याचिकाएं
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने बताया कि दोनों भाई-बहन ने अलग-अलग हाईकोर्ट में लंबित मामलों को ट्रांसफर करने की मांग की थी। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मुंबई हाईकोर्ट में लंबित मामलों को राजस्थान हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की याचिका दायर की थी, जबकि पद्मजा कुमारी परमार ने जोधपुर बेंच राजस्थान हाईकोर्ट से मामलों को बॉम्बे हाईकोर्ट भेजने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी मामलों को एक मंच पर सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। साथ ही, अन्य लंबित मामलों को भी वहीं स्थानांतरित करने की अनुमति दी गई है।
पुराना और जटिल है विवाद का इतिहास
मेवाड़ के पूर्व महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ के तीन संतानें थीं—महेंद्र सिंह मेवाड़, अरविंद सिंह मेवाड़ और योगेश्वरी कुमारी। वर्ष 1983 में भगवत सिंह मेवाड़ ने पारिवारिक संपत्तियों को बेचने और लीज पर देने का निर्णय लिया, जिसका बड़े पुत्र महेंद्र सिंह मेवाड़ ने विरोध किया और अदालत का रुख किया। इसके बाद भगवत सिंह मेवाड़ ने संपत्ति और ट्रस्ट से जुड़े निर्णयों की जिम्मेदारी छोटे पुत्र अरविंद सिंह मेवाड़ को सौंप दी।
2020 में आया अहम फैसला
3 नवंबर 1984 को भगवत सिंह मेवाड़ के निधन के बाद विवाद और गहराता गया। करीब 37 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद वर्ष 2020 में उदयपुर जिला न्यायालय ने संपत्तियों को चार हिस्सों में बांटने का आदेश दिया। एक हिस्सा भगवत सिंह मेवाड़ के नाम और शेष तीन हिस्से उनकी संतानों में बांटे गए। हालांकि, अधिकांश संपत्तियां लंबे समय तक अरविंद सिंह मेवाड़ के नियंत्रण में रहीं।
