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अमरखजी महादेव लेपर्ड कंज़र्वेशन रिज़र्व: कागज़ों में आगे, ज़मीन पर धीमा

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अमरखजी महादेव लेपर्ड कंज़र्वेशन रिज़र्व: कागज़ों में आगे, ज़मीन पर धीमा

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अधिसूचना के दो साल बाद भी संरक्षण कार्यों को नहीं मिली रफ्तार
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 5 जनवरी:
अरावली की पहाड़ियों में तेंदुओं (लेपर्ड) के संरक्षण और मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में अहम माने जा रहे अमरखजी महादेव लेपर्ड कंज़र्वेशन रिज़र्व को अधिसूचित हुए दो साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब तक ज़मीनी स्तर पर अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। अक्टूबर 2023 में अधिसूचित यह रिज़र्व सरकारी रिकॉर्ड में तो दर्ज हो गया, परंतु अधिकांश योजनाएं अब भी प्रारंभिक चरण तक ही सीमित हैं।
वन विभाग ने अमरखजी महादेव लेपर्ड कंज़र्वेशन रिज़र्व की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर इसके लिए लगभग 30 करोड़ रुपए का बजट अनुमानित किया था, लेकिन बजट स्वीकृति और संसाधनों की कमी के चलते वास्तविक विकास कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।
अरावली में फैला 7 हजार हेक्टेयर का प्रस्तावित रिज़र्व
अमरखजी महादेव लेपर्ड कंज़र्वेशन रिज़र्व उदयपुर–राजसमंद सीमा क्षेत्र में अरावली की पहाड़ियों के बीच प्रस्तावित है। यह क्षेत्र अमरखजी महादेव मंदिर से लेकर देबारी, कुराबड़ और मावली रेंज तक फैला हुआ है। वन विभाग के अनुसार रिज़र्व का कुल प्रस्तावित क्षेत्रफल लगभग 7,000 से 7,400 हेक्टेयर है। घने वन क्षेत्र, प्राकृतिक जलस्रोत और पहाड़ी भू-आकृति इस इलाके को तेंदुओं के लिए आदर्श प्राकृतिक आवास बनाते हैं।
योजनाएं बनीं, अमल में सुस्ती
रिज़र्व के लिए तैयार कार्ययोजना में तेंदुओं की प्रे-बेस बढ़ाने, स्थायी जल संरचनाओं के निर्माण, कैमरा ट्रैप से वैज्ञानिक निगरानी और पेट्रोलिंग ट्रैक विकसित करने जैसे बिंदु शामिल हैं। प्रारंभिक सर्वे और तकनीकी आकलन पूरे हो चुके हैं, लेकिन वित्तीय स्वीकृति में देरी के कारण संरक्षण और निर्माण से जुड़े ठोस कार्य शुरू नहीं हो सके।
मानव–वन्यजीव संघर्ष में कमी की उम्मीद
बीते वर्षों में उदयपुर और आसपास के ग्रामीण–शहरी इलाकों में तेंदुओं की आवाजाही बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमरखजी महादेव रिज़र्व को समयबद्ध तरीके से विकसित किया गया, तो यह तेंदुओं के लिए सुरक्षित मूवमेंट कॉरिडोर तैयार करने और मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। साथ ही, दीर्घकाल में यह क्षेत्र ईको-टूरिज्म की संभावनाओं को भी मजबूती दे सकता है।
अधिकारियों का दावा—संसाधन मिलते ही काम तेज होगा
वन विभाग के वन संरक्षक अजय चित्तौड़ा ने बताया कि अमरखजी महादेव लेपर्ड कंज़र्वेशन रिज़र्व विभाग की प्राथमिक परियोजनाओं में शामिल है। अधिसूचना के बाद बेसलाइन स्टडी और तकनीकी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। बजट स्वीकृति में देरी से कुछ कार्य प्रभावित हुए हैं, लेकिन संसाधन उपलब्ध होते ही प्रे-बेस विकास, जल संरचनाओं और कैमरा ट्रैप जैसे कार्य तेज़ी से शुरू किए जाएंगे। लक्ष्य है कि अगले एक–दो वर्षों में रिज़र्व को पूरी तरह कार्यशील बनाया जाए।
जिले की दूसरी लैपर्ड सफारी बनेगा अमरखजी
परियोजना पूरी होने पर अमरखजी महादेव रिज़र्व जिले की दूसरी लेपर्ड सफारी के रूप में विकसित होगा। यहां तीन पेट्रोलिंग ट्रैक प्रस्तावित हैं—33 किलोमीटर, 20.5 किलोमीटर और 53.5 किलोमीटर लंबे—जिन्हें भविष्य में सफारी मार्ग के रूप में उपयोग किया जाएगा। फिलहाल जिले में जयसमंद क्षेत्र में लेपर्ड सफारी संचालित है।

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