कोमा से मास्टर शेफ तक: उदयपुर की मनीषा शर्मा ने हौसले से रचा इतिहास
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सेकेंडरी पार्किंसंस से जूझते हुए मास्टर शेफ इंडिया सीजन-9 तक पहुंचीं, जजों ने किया साहस को सलाम
उदयपुर, 17 जनवरी: “अगर प्रॉब्लम से प्यार कर लो, तो प्रॉब्लम महसूस ही नहीं होगी।” यह वाक्य सिर्फ एक सोच नहीं, बल्कि उदयपुर की मनीषा शर्मा (29) की जिंदगी का सच है। सेकेंडरी पार्किंसंस रोग से पीड़ित मनीषा ने सोनी टीवी के चर्चित शो ‘मास्टर शेफ इंडिया सीजन-9’ तक का सफर तय कर न सिर्फ उदयपुर बल्कि देशभर के युवाओं के लिए मिसाल कायम की है। शो के दौरान जब वह कुकिंग कर रही थीं, तब उनका शरीर कंपन कर रहा था, हाथ कांप रहे थे, लेकिन हौसला अडिग था।
बीमारी के बावजूद सपनों की उड़ान
मनीषा बताती हैं कि वह कुकिंग के क्षेत्र में कुछ बड़ा करना चाहती हैं और उन लोगों के लिए प्रेरणा बनना चाहती हैं, जो बीमारी या परिस्थितियों से डरकर अपने सपनों को छोड़देते हैं। उनका लक्ष्य अपना कैफे खोलना है, ताकि संघर्षरत लोगों को भी मंच मिल सके।
ऐसे पहुंचीं मास्टर शेफ के मंच तक
मास्टर शेफ इंडिया सीजन-9 के लिए मनीषा का पहला ऑडिशन जयपुर में हुआ, जहां 100 प्रतिभागियों में से उनका चयन हुआ। दूसरे राउंड के लिए दिल्ली बुलाया गया, जिसमें घर से बनाई डिश ले जानी थी। मनीषा सिंघाड़े और शकरकंद का हलवा लेकर पहुंचीं। इसके बाद मुंबई के लिए क्वालिफाई किया।
मुंबई राउंड में पार्टनर अनिवार्य था और वह भी ब्लड रिलेशन। मनीषा ने अपने पिता रतन शर्मा को कुकिंग पार्टनर बनाया। 5 दिसंबर 2025 को शो शूट हुआ और 7 जनवरी 2026को प्रसारित हुआ।
जज हुए भावुक, एप्रिन पहनाकर किया सम्मान
शो में मनीषा और उनके पिता ने ‘ट्विस्ट कबाब’ और ‘टू इन वन खीर’ बनाई, जिसे जज विकास खन्ना, रणवीर बरार और कुणाल कपूर ने खूब सराहा। मनीषा की हिम्मत से प्रभावित होकर जजों ने उन्हें हस्ताक्षरित एप्रिन पहनाया। जजों ने कहा—“जब भी हम डिमोरलाइज होंगे, मनीषा की हिम्मत को याद करेंगे।”
सात साल की उम्र से किचन से रिश्ता
मनीषा ने बताया कि सात साल की उम्र में मां की तबीयत खराब होने पर उन्होंने पहली बार दलिया बनाया। स्वाद भले सही न हो, लेकिन वहीं से कुकिंग उनके जीवन का पैशन बन गई।

परिवार बना ताकत
मनीषा ने अपने फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट में मां को “लाइफ लाइन”, भाई को “माय सपोर्ट” और पिता को “केसीपी—किचन कुकिंग पार्टनर” नाम दिया है। परिवार का साथ ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
कोमा से जंग, आज भी इलाज जारी
पिता रतन शर्मा बताते हैं कि 2011 में ब्रेन फीवर के कारण मनीषा को मेनिनजाइटिस हुआ और वह कोमा में चली गई थीं। उसी बीमारी के बाद सेकेंडरी पार्किंसंस विकसित हुआ। आज भी लखनऊ, अहमदाबाद और उदयपुर में उनका इलाज जारी है।
हौसले की जीत
मां सरिता शर्मा कहती हैं—“कोमा से मास्टर शेफ तक का सफर किसी चमत्कार से कम नहीं। यह चमत्कार मनीषा ने अपने हौसले से कर दिखाया है।” मनीषा की कहानी बताती है कि हालात कितने भी कठिन हों, अगर इरादे मजबूत हों तो हर मंच जीता जा सकता है।
