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यात्री बे-बस: रोडवेज बस स्टैंड पर गुजरानी पड़ रही रात

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यात्री बे-बस: रोडवेज बस स्टैंड पर गुजरानी पड़ रही रात

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उदयपुर संभाग में तीसरे दिन भी चक्का जाम, कुछ बसों के टायरों की हवा निकाली; एक रोडवेज बस के संचालन पर उठे सवाल
उदयपुर, 26 फरवरी:
उदयपुर संभाग में निजी बस संचालकों की हड़ताल तीसरे दिन और उग्र हो गई। प्रतापगढ़ व बांसवाड़ा सहित संभाग के जिलों में 400 से अधिक निजी बसें बंद रहीं, जिससे हजारों यात्री बे-बस नजर आए। रोडवेज बस स्टैंड पर रातभर यात्रियों की भीड़ जमी रही और कई परिवारों को खुले प्लेटफॉर्म पर ही रात गुजारनी पड़ी।
प्रतापगढ़ में करीब 130 बसें बंद रहीं। संचालक बस बॉडी कोड (152, 153, 119) को 31 मार्च 2026 के बाद बनने वाली नई बसों पर लागू करने तथा पुरानी बसों को राहत देने की मांग पर अड़े हैं। फिटनेस सेंटर की स्थानीय स्थापना और परमिट की 24 घंटे ऑनलाइन-ऑफलाइन सुविधा भी प्रमुख मांगों में शामिल है।
बांसवाड़ा में 280 से 300 बसों के चक्के जाम रहे। निजी बस एसोसिएशन के अध्यक्ष मुजफ्फर अली ने परिवहन विभाग पर लगातार चालान और सीज की कार्रवाई का आरोप लगाया। उनका कहना है कि रेल व हवाई सेवा के अभाव में जिले की जनता पूरी तरह बसों पर निर्भर है।
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब जो बसें संचालित की जा रही थीं, उनके टायरों की हवा निकालने की शिकायतें सामने आईं। उदयपुर में उदयपुर से जयपुर संचालित की जा रही रोडवेज बस को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया, जिसके संचालन पर स्थानीय बस कारोबारियों ने सवाल उठाए। उनका आरोप है कि निजी बसों के बंद रहने के बावजूद कुछ विशेष रूटों पर संचालन को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही।
उदयपुर, डूंगरपुर, राजसमंद और चित्तौड़गढ़ में भी ग्रामीण रूट प्रभावित रहे। रोडवेज बसों में क्षमता से अधिक भीड़ रही; बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। बाजना से दूदू जाने वाले 18 यात्री शाम से देर रात तक बस की प्रतीक्षा करते रहे।
संचालकों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है। त्योहारों के निकट आते ही यह गतिरोध आमजन के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है।

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