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वेस्ट टू वंडर : अनुपयोगी लकड़ी से बने बर्ड हाउस, पार्कों और परिसरों में लगाए

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वेस्ट टू वंडर : अनुपयोगी लकड़ी से बने बर्ड हाउस, पार्कों और परिसरों में लगाए

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पर्यावरण संतुलन के लिए युवाओं को जोड़ा, जागरूकता अभियान भी शुरू
उदयपुर, 1 मार्च:
पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में देवगढ़ से एक प्रेरक पहल सामने आई है। नगर पालिका के मुख्यमंत्री जन सदभावना केंद्र, देवगढ़ और करियर संस्थान राजसमंद के संयुक्त तत्वावधान में ‘वेस्ट टू वंडर’अभियान के तहत अनुपयोगी लकड़ी और गत्ते से आकर्षक बर्ड हाउस तैयार कर शहर के पार्कों, शिक्षण परिसरों और आवासीय क्षेत्रों में लगाए गए हैं।
इस पहल का उद्देश्य केवल पक्षियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देना भी है कि बेकार समझी जाने वाली सामग्री को रचनात्मक सोच से उपयोगी बनाया जा सकता है। शहरीकरण के बीच पक्षियों के प्राकृतिक बसेरे कम होते जा रहे हैं। ऐसे में कृत्रिम बर्ड हाउस उनके लिए सुरक्षित विकल्प बन सकते हैं।
स्वच्छ भारत ब्रांड एम्बेसेडर देवगढ़ भावना पालीवाल ने बताया कि वे ‘सोन चिड़िया मेरी बिटिया’अभियान के माध्यम से कई वर्षों से पर्यावरण और संवेदनशीलता के विषय पर कार्य कर रही हैं। इस बार पूरी तरह वेस्ट लकड़ी और गत्ते के टुकड़ों से बर्ड हाउस तैयार किए गए, साथ ही कुछ स्थानों पर मिट्टी से बने प्राकृतिक बर्ड हाउस भी लगाए गए, जो तापमान के अनुकूल और पक्षियों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।
अभियान की विशेष बातें
वेस्ट लकड़ी और गत्ते का रचनात्मक पुनः उपयोग
सार्वजनिक स्थलों पर व्यवस्थित स्थापना
युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी
रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल की अवधारणा को बढ़ावा
अभियान से जोड़ेंगे स्कूल
आने वाले समय में स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को जोड़कर अधिक संख्या में बर्ड हाउस लगाए जाएंगे। साथ ही पर्यावरण संरक्षण विषय पर कार्यशालाएं और जनजागरूकता कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

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