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आदिवासी अंचल में मातृभाषा में पढ़ाई का प्रयोग सफल

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आदिवासी अंचल में मातृभाषा में पढ़ाई का प्रयोग सफल

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वागड़ी और गरासिया भाषा में शिक्षा से बच्चों की रुचि और समझ बढ़ी
सुभाष शर्मा, उदयपुर, 6 मार्च:
राजस्थान के आदिवासी अंचल में बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने का प्रयोग सफल साबित हो रहा है। सिरोही और डूंगरपुर जिलों के करीब 200 सरकारी स्कूलों में स्थानीय वागड़ी और गरासिया भाषाओं में पढ़ाई कराए जाने से बच्चों की पढ़ाई में रुचि और समझ में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
शिक्षकों का कहना है कि जब बच्चों से उनकी ही भाषा में संवाद किया जाता है तो वे पढ़ाई से जल्दी जुड़ जाते हैं। उदाहरण के तौर पर ‘पानी’ को ‘पाणी’, ‘पिता’ को ‘बापू’ और ‘बच्चे’ को ‘छोकरो’ जैसे स्थानीय शब्दों के प्रयोग से बच्चों में अपनापन बढ़ता है और वे विषय को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
इस नवाचार के तहत पहले चरण में कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों पर यह प्रयोग किया गया। मातृभाषा में सीखने के कारण बच्चे महज दो वर्षों में हिंदी आधारित मुख्य शिक्षा से भी आसानी से जुड़ने लगे हैं।
अब राज्य की 11 अन्य भाषाओं में तैयार हो रहा पाठ्यक्रम
इस प्रयोग की सफलता को देखते हुए अब राज्य में बोली जाने वाली 11 अन्य स्थानीय भाषाओं में भी पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। बहुभाषी शिक्षा का दायरा आने वाले समय में पाली, जयपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ सहित कई जिलों तक बढ़ाया जाएगा। आरएससीईआरटी की निदेशक श्वेता फगेड़िया के अनुसार शुरुआत डूंगरपुर और सिरोही से की गई थी, जहां बच्चों को उनकी स्थानीय भाषा में पढ़ाने से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जल्द ही अन्य जिलों में भी यह मॉडल लागू किया जाएगा।

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