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शीतला अष्टमी पर निकली ‘मुर्दे की सवारी’, 426 साल पुरानी परंपरा निभाई

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शीतला अष्टमी पर निकली ‘मुर्दे की सवारी’, 426 साल पुरानी परंपरा निभाई

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अर्थी से उठकर नाचता रहा युवक, जूते-चप्पलों से प्रतीकात्मक पिटाई
भीलवाड़ा, 11 मार्च:
शहर में शीतला अष्टमी के अवसर पर 426 साल पुरानी अनोखी परंपरा ‘मुर्दे की सवारी’ बुधवार को उत्साह के साथ निभाई गई। इस दौरान एक युवक को अर्थी पर लिटाकर ढोल-नगाड़ों के साथ शवयात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग गुलाल उड़ाते हुए शामिल हुए।
यात्रा चित्तौड़ वालों की हवेली से शुरू होकर रेलवे स्टेशन चौराहा, गोल प्याऊ और भीमगंज क्षेत्र से होते हुए बड़े मंदिर तक पहुंची। परंपरा के अनुसार अर्थी पर लेटे युवक को साथ चल रहे लोग जूते-चप्पलों से प्रतीकात्मक रूप से मारते रहे, जबकि युवक बीच-बीच में उठकर नाचने लगता था।
बड़े मंदिर पहुंचने पर युवक अर्थी से उठकर भाग गया, जिसके बाद प्रतीकात्मक रूप से अर्थी का दाह संस्कार किया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस परंपरा से समाज में आपसी मतभेद दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस आयोजन में परंपरागत रूप से महिलाएं शामिल नहीं होती हैं।

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