चाइल्ड पोनोग्राफी वायरल करने के दोषी को 5 हजार का जुर्माना
Share
उदयपुर, 19 फरवरी: लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 एवं बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 संख्या-02 के पीठासीन अधिकारी संजय कुमार भटनागर ने मोबाइल के वॉट्सएप से चाइल्ड पोनोग्राफी वायरल करने के मामले में आरोपी को पांच हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया।
विशिष्ठ लोक अभियोजक महेंद्र ओझा ने बताया कि गोगुंदा थाना पुलिस ने आरोपी कालूराम पुत्र मानाराम निवासी अवाणी रावलिया कलां के विरुद्ध धारा 15 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 व धारा 67बी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के अंतर्गत न्यायालय में 1 जुलाई 2024 को आरोप पत्र पेश किया।
जिला पुलिस अधीक्षक से 19 दिसम्बर 2022 को राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो नई दिल्ली से एक टिपलाइन शिकायत प्राप्त हुई जिसकी जांच में आरोपी के मोबाइल वॉटसएप से चाइल्ड पोनोग्राफी वायरल करना पाया। न्यायाधीश भटनागर ने फैसले में कहा कि वर्तमान में इंटरनेट चाइल्ड पोनोग्राफी का तकनीकी बाजार जोर—शोर से चल रहा है। उक्त अपराध नैतिक अधमता से संबंधित है ऐसे अपराधों में यदि परिवीक्षा का लाभ दिया गया तो निश्चित रूप से ऐसे अपराधों में बढोत्तरी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। यद्यपि अभियुक्त का यह प्रथम अपराध होना एवं उसके विरुद्ध कोई पूर्व दोषसिद्धि नहीं होना बताया है, परंतु अभियुक्त के विरुद्ध आरोपी अपराध धारा 15 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 अभियोजन ने उपरोक्त साक्ष्य विवेचन, विश्लेषण में साबित किया है जो अपराध गंभीर प्रकृति का है। इन परिस्थितियों में अभियुक्त को उसके विरूद्ध आरोपित अपराध में परिवीक्षा का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं है। प्रकरण के समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अभियुक्त कालूराम को तुरंत कारावास से दंडित करने की बजाय धारा 15 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के आरोप में 5000 रुपए अर्थदंड से दंडित किया जाता है। साथ ही जब्तशुदा मोबाइल में से अश्लील सामग्री हटाकर अपील की मियाद गुजरने के बाद उसके क्रेता को देने के आदेश दिए।
