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आयड़ पर आर-पार की हुंकार, बोले आंदोलकारी – एक घूंट पानी पीकर दिखा दे प्रशासन, आंदोलन खत्म कर देंगे

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आयड़ पर आर-पार की हुंकार, बोले आंदोलकारी – एक घूंट पानी पीकर दिखा दे प्रशासन, आंदोलन खत्म कर देंगे

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कानपुर पुलिया से उठी जनलहर, 12 गांवों ने ढोल-नगाड़े बजाकर छेड़ा महाआंदोलन
उदयपुर, 25 फरवरी:
उदयपुर शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली आयड़ नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए बुधवार को कानपुर खेड़ा की पुलिया से जन-आक्रोश फूट पड़ा। मेवाड़ किसान संघर्ष समिति, झील बचाओ संघर्ष समिति और अन्य संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में “आयड़ नदी बचाओ महाआंदोलन”का आगाज ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ किया गया। क्षेत्र के 12 गांवों से ग्रामीण एक-एक ढोल लेकर पहुंचे और एक साथ 12 ढोल बजाकर शासन-प्रशासन को चेतावनी दी।


आंदोलन की शुरुआत साधु-संतों के सान्निध्य में आयड़ नदी की महाआरती से हुई। महंत कैलाश नाथ ने शंख बजाकर विधिवत शुभारंभ किया। ग्रामीणों ने आयड़ को “आस्था की गंगा”मानकर पूजा-अर्चना की और नदी को स्वच्छ बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। प्रदर्शन में पंच-पटेल, युवा, महिलाएं और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
समिति के संयोजक विष्णु पटेल ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण मंडल को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि अधिकारी नदी का एक घूंट पानी पीकर दिखा दें तो वे आंदोलन समाप्त कर देंगे। उनका आरोप है कि मेवाड़ औद्योगिक क्षेत्र और कलड़वास औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक व गंदा पानी वर्षों से आयड़ में गिर रहा है, जो आगे उदयसागर तक पहुंच रहा है। इससे भूजल दूषित हो रहा है और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।


संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का दावा है कि केमिकलयुक्त पानी के कारण लगभग 12 किलोमीटर क्षेत्र में करीब 10 हजार बीघा कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी में सीवरेज और औद्योगिक अपशिष्ट के कारण जगह-जगह झाग बन रहे हैं और पानी जहरीला हो चुका है।
ग्राम पंचायत कानपुर के पूर्व उपसरपंच मदनलाल डांगी ने कहा कि यह तो केवल शुरुआत है। यदि समय रहते ठोस कार्ययोजना लागू नहीं की गई तो आंदोलन कलेक्ट्रेट तक पहुंचकर व्यापक रूप लेगा। मनवाखेड़ा, मादड़ी, कलड़वास, खेड़ा, कानपुर, भोइयों की पंचोली, मटून, खरबड़िया, लकड़वास, टीला खेड़ा, कमलोद और अन्य गांवों के ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का संकेत दिया है।
ग्रामीणों की मांग है कि आयड़ में गिर रहे प्रदूषित जल को तत्काल रोका जाए, औद्योगिक इकाइयों की जांच हो तथा वैज्ञानिक आधार पर स्थायी शुद्धीकरण योजना लागू की जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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