विविध लोक सांस्कृतिक विधाओं का धमाकेदार आगाज
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राजस्थान और पंजाब के राज्यपालों ने नगाड़ा बजाकर किया उद्घाटन
उत्सव के पहले ही दिन रविवार होने से उमड़े मेलार्थी
उदयपुर, 21 दिसम्बर: पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर में दस दिवसीय ‘शिल्पग्राम उत्सव 2025’ का रंगारंग आगाज रविवार को राजस्थान और पंजाब के राज्यपालों ने दीप प्रज्वलित कर एवं नगाड़ा बजाकर किया।
इस खास अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि लोक कला जीवन का असली आलोक है और बच्चों को इसकी शिक्षा देकर संस्कृति को आगे बढ़ाना आवश्यक है। वहीं, पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने इसे ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत का जीवंत प्रतीक’ बताते कहा कि यह महोत्सव देश की विविध सांस्कृतिक परम्पराओं को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इससे पूर्व दोनों राज्यपालों ने एक-दूसरे का स्वागत किया। समारोह में उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत, शहर विधायक ताराचंद जैन और ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा भी मौजूद रहे।
इस दौरान दो कलाकारों को डॉ. कोमल कोठारी स्मृति लाइफटाइम अचीवमेंट लोक कला पुरस्कार के तहत राजकोट (गुजरात) के डॉ. निरंजन वल्लभभाई राज्यगुरु और जयपुर (राजस्थान) के रामनाथ चौधरी को एक रजत पट्टिका एवं 2.51 लाख रुपए की राशि से सम्मानित किया गया।
समारोह में देशभर की लोक संस्कृतियों की झलक प्रस्तुत की गई। कोरियोग्राफिक फोक डांस में गोवा के देखनी व घोड़े मोदनी, मणिपुर के लैहारोबा, कश्मीर के रौफ, राजस्थान के लाल आंगी व चरी, कर्नाटक के पूजा कुनिता व ढालू कुनिता, महाराष्ट्र के सोंगी मुखौटा, पंजाब के लुड्डी और गुजरात के तलवार रास व राठवा नृत्यों का महासंगम दर्शकों का मन मोह गया।
कथक और लावणी का फोक-क्लासिकल फ्यूजन, श्रद्धा सतवीड़कर और नितिन कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसी कड़ी में डॉ. प्रेम भंडारी के निर्देशन में राजस्थानी लोक गीतों पर आधारित मेडले ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह में मंच पर प्रस्तुत कला और संगीत ने शिल्पग्राम उत्सव की पहली एक यादगार अनुभव बना दिया।
