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आयड़ फिर से होने लगी गंदी, लगाए थे 72 करोड़ रुपए

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आयड़ फिर से होने लगी गंदी, लगाए थे 72 करोड़ रुपए

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उदयपुर, 5 मार्च: शहर की पहचान मानी जाने वाली आयड़ रिवर को संवारने के लिए करीब 72 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। उद्देश्य था कि उदयपुर को स्वच्छ और सुंदर जलधारा मिले, नदी क्षेत्र विकसित हो और आसपास का वातावरण बेहतर बने। लगभग पांच किलोमीटर क्षेत्र में सौंदर्यीकरण, पक्का निर्माण, घाट और वॉक-वे जैसी सुविधाएं विकसित की गई थीं।
लेकिन अब हालात फिर चिंताजनक नजर आ रहे हैं। नदी के कई हिस्सों में गंदगी, प्लास्टिक कचरा और गाद जमा हो गई है। बरसात के दौरान बहकर आने वाली मिट्टी और अपशिष्ट ने स्थिति और बिगाड़ दी है। कुछ स्थानों पर घास-फूस उग आई है, तो कहीं घरेलू कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं। इससे नदी का प्रवाह भी कई जगह बाधित हो रहा है और बदबू की समस्या बढ़ने लगी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में सफाई और निगरानी व्यवस्था प्रभावी रही, लेकिन समय के साथ नियमित रखरखाव में ढिलाई बरती गई। परियोजना पूर्ण होने के बाद सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी को लेकर नगर निगम, स्मार्ट सिटी प्रबंधन और ठेकेदार के बीच स्पष्टता नहीं रही। टेंडर प्रक्रिया और डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (डीएलपी) को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी रही, जिससे नियमित सफाई कार्य प्रभावित हुआ। नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि सफाई के लिए अलग वार्षिक बजट का प्रावधान किया गया है और व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के प्रयास जारी हैं। वहीं नागरिकों का मानना है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद यदि नियमित निगरानी और समन्वय नहीं हो, तो परियोजना का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

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