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अंतरिक्ष मौसम से संभावित खतरों पर मिलेगा अग्रिम अलर्ट: डॉ. किरण कुमार

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अंतरिक्ष मौसम से संभावित खतरों पर मिलेगा अग्रिम अलर्ट: डॉ. किरण कुमार

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उदयपुर सौर वेधशाला की स्वर्ण जयंती पर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन का शुभारंभ
उदयपुर, 10 फरवरी:
इसरो के पूर्व चेयरमैन पद्मश्री डॉ. ए.एस. किरण कुमार ने कहा कि अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) अब केवल वैज्ञानिक शोध का विषय नहीं रहा, बल्कि यह पृथ्वी और अंतरिक्ष दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। सूर्य की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखकर भविष्य में संभावित खतरों से पहले ही पृथ्वी, उपग्रहों और अंतरिक्ष मिशनों को अलर्ट किया जा सकेगा।
वे मंगलवार को उदयपुर सौर वेधशाला के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर थर्ड स्पेस परिसर में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन की थीम ‘एक्सप्लोरिंग द सन एट हाई-रिजोल्यूशन: प्रेजेंट पर्सपेक्टिव्स एंड फ्यूचर होराइजन्स’ रखी गई है।
स्पेस वेदर भविष्य की बड़ी जरूरत
डॉ. कुमार ने कहा कि सूर्य की गतिविधियां पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र, जीपीएस, मोबाइल नेटवर्क, संचार प्रणालियों और अंतरिक्ष यानों को प्रभावित करती हैं। इसलिए स्पेस वेदर की सटीक भविष्यवाणी आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।
उन्होंने बताया कि आधुनिक कंप्यूटिंग सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकें सूर्य से मिलने वाले डेटा को ‘अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ में बदलकर मानवता को बड़े संकटों से बचा सकती हैं।
आदित्य-एल1 मिशन से मिली नई उपलब्धि
डॉ. कुमार ने इसरो के आदित्य-एल1 मिशन को भारत की ऐतिहासिक सफलता बताते हुए कहा कि इससे पहली बार सूर्य के फोटोस्फीयर का बेहद करीब से अध्ययन संभव हुआ है। आने वाले वर्षों में यह डेटा अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी का मजबूत आधार बनेगा।
वैज्ञानिक समर्पण की सराहना
समारोह में मेवाड़ पूर्व राजपरिवार की सदस्य निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों को सहयोग देगा। पीआरएल के प्रो. अनिल भारद्वाज ने स्वागत भाषण में वेधशाला के वैज्ञानिक योगदानों पर प्रकाश डाला। प्रो. भुवन जोशी ने स्थापना से लेकर 50 वर्षों की यात्रा साझा की।
100 से अधिक वैज्ञानिकों की भागीदारी
सम्मेलन में भारत और विदेशों से करीब 100 प्रतिष्ठित सौर भौतिकविद भाग ले रहे हैं। तकनीकी सत्रों में उन्नत दूरबीनों और मिशनों से प्राप्त सौर घटनाओं के निष्कर्ष साझा किए जाएंगे।

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