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H-1B फीस बढ़ी तो चीन ने लॉन्च किया K-वीजा, ब्रिटेन भी ला सकता है बड़ा बदलाव

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H-1B फीस बढ़ी तो चीन ने लॉन्च किया K-वीजा, ब्रिटेन भी ला सकता है बड़ा बदलाव

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STEM प्रोफेशनल्स को मिलेगा नया विकल्प, बिना जॉब ऑफर भी कर सकेंगे आवेदन

बीजिंग/लंदन/वॉशिंगटन, 22 सितम्बर : अमेरिका ने H-1B वीजा की फीस 6 लाख रुपए से बढ़ाकर करीब 88 लाख रुपए कर दी है। इससे विदेशियों के लिए अमेरिका जाना महंगा हो गया है। इसी बीच चीन ने नया K-वीजा शुरू करने का ऐलान किया है, जिसे H-1B का विकल्प माना जा रहा है।

K-वीजा की खासियत
यह वीजा STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स) से जुड़े युवाओं और स्किल्ड प्रोफेशनल्स को मिलेगा। 1 अक्टूबर 2025 से जारी होने वाले इस वीजा के लिए चीनी कंपनी से जॉब ऑफर जरूरी नहीं होगा। इससे विदेशी विशेषज्ञ सीधे शिक्षा और अनुभव के आधार पर आवेदन कर सकेंगे। अभी चीन में Z-वीजा और R-वीजा से काम करने की अनुमति मिलती है, लेकिन इसमें नौकरी का ऑफर अनिवार्य होता है।

ब्रिटेन भी फीस खत्म कर सकता है
ब्रिटेन सरकार ग्लोबल टैलेंट वीजा की 90 हजार रुपए तक की फीस खत्म करने पर विचार कर रही है। जिन लोगों ने दुनिया की टॉप-5 यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है या बड़ा इंटरनेशनल अवॉर्ड जीता है, उनके लिए पूरी फीस माफ हो सकती है।

चीन का लक्ष्य 2035 तक टेक पावर बनना
चीन ने विदेशी प्रतिभाओं को लाने के लिए दो प्रोग्राम शुरू किए हैं—

  • टैलेंटेड यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम: एशिया-अफ्रीका के 45 साल तक के शोधकर्ताओं के लिए।
  • आउटस्टैंडिंग यंग साइंटिस्ट फंड: 40 साल तक के टॉप वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए।
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