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पारंपरिक ज्ञान में आधुनिक दृष्टिकोण जोड़कर राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनें कृषि वैज्ञानिक: राज्यपाल बागड़े

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पारंपरिक ज्ञान में आधुनिक दृष्टिकोण जोड़कर राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनें कृषि वैज्ञानिक: राज्यपाल बागड़े

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एमपीयूएटी उदयपुर का 19वां दीक्षांत समारोह, 44 को स्वर्ण पदक व 1181 विद्यार्थियों को उपाधियां

उदयपुर, 22 दिसम्बर:
राजस्थान के राज्यपाल एवं महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) उदयपुर के कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि शोध, नवाचार और किसानों के हित में कार्य करने वाले संस्थान भी हैं। उन्होंने आह्वान किया कि कृषि वैज्ञानिक पारंपरिक कृषि ज्ञान में आधुनिक दृष्टिकोण का समावेश कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। राज्यपाल सोमवार को एमपीयूएटी के 19वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
जैविक खेती और केमिकल मुक्त अनाज पर जोर
राज्यपाल बागड़े ने श्रीगंगानगर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि गंगा नहर क्षेत्र में केमिकल युक्त पानी के कारण कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में केमिकल मुक्त अनाज उत्पादन और जैविक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना खेती को आगे बढ़ाने पर विश्वविद्यालयों को गंभीरता से कार्य करना चाहिए। उन्होंने खेती में बैलों और गोधन के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि मेहनत और पारंपरिक तरीकों से खेती को और सुदृढ़ किया जा सकता है।
जनजाति क्षेत्रों में शिक्षा जरूरी
राज्यपाल ने जनजाति और पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि शिक्षा से ही समानता संभव है। गांव समृद्ध होंगे तो जिला, प्रदेश और देश समृद्ध होगा। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और देश की दो-तिहाई आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है।


1181 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 44 को स्वर्ण पदक
समारोह में राज्यपाल ने 934 स्नातक, 171 स्नातकोत्तर और 76 विद्यावाचस्पति (पीएचडी) अभ्यर्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। साथ ही अकादमिक उत्कृष्टता के लिए 44 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। कुलगुरु डॉ. प्रतापसिंह की अनुपस्थिति में कुल सचिव ने विश्वविद्यालय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
युवाओं को नौकरी नहीं, नवाचार की राह चुनने की सलाह
कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि युवा केवल डिग्री लेकर नौकरी के पीछे न भागें। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे भूमि बंजर हो रही है। उन्होंने नकली डीएपी फैक्ट्रियों पर कार्रवाई का उल्लेख किया और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी। फूड प्रोसेसिंग को किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम बताया।
समारोह में अव्यवस्था पर नाराजगी
समारोह की शुरुआत में व्यवस्थाओं में बार-बार बदलाव से नाराज अभ्यर्थी अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और सामूहिक दीक्षा के बजाय एक-एक कर डिग्री देने की मांग की। बाद में अभ्यर्थियों को एक-एक कर डिग्री प्रदान की गई। इस दौरान राज्यपाल के माइक में तकनीकी खराबी भी सामने आई। समारोह में यूनेस्को महात्मा गांधी शांति एवं विकास संस्थान के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रसाद शर्मा, बेंगू विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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