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यूडीए पेराफेरी में पट्टों को लेकर सर्व समाज का कलेक्ट्रेट घेराव

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यूडीए पेराफेरी में पट्टों को लेकर सर्व समाज का कलेक्ट्रेट घेराव

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उदयपुर, 17 नवम्बर: यूडीए पेराफेरी क्षेत्र की पंचायतों में पट्टे जारी करवाने की मांग को लेकर सोमवार को पेराफेरी पंचायत संघर्ष समिति के नेतृत्व में सर्व समाज का बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। तीन दर्जन से अधिक गांवों के सैकड़ों ग्रामीण सुबह से ही कलेक्ट्रेट पहुंच गए और करीब दो घंटे तक कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव कर प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
धरने को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति संयोजक चंदन सिंह देवड़ा ने कहा कि पेराफेरी पंचायतों में आबादी व उससे लगती जमीन पर बसे लोगों को 4 जनवरी 2022 के आदेश के अनुसार तुरंत पट्टे जारी किए जाएं। जिन पंचायतों को नगर निगम में शामिल कर दिया गया है, वहां 69-ए नियम में संशोधन करते हुए बसावट के आधार पर पट्टे देने की मांग रखी गई। उन्होंने यह भी कहा कि बिना नोटिस जिन गरीबों के मकान तोड़े गए, उनका पुनर्वास तुरंत किया जाए और यूडीए द्वारा गरीबों के आशियाने तोड़ने की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए।
सर्व समाज के प्रतिनिधि प्रकाश प्रजापत, शोभा लाल व अन्य वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन अब भी ग्रामीणों की अनदेखी करता है या बिना नोटिस किसी मकान को तोड़ने का प्रयास करता है, तो बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। प्रदर्शन में डॉ. दिव्यानी कटारा, फतेह सिंह राठौड़, शंकर लाल डांगी, हेमराज गुर्जर, जीवन सिंह, सोहन लाल, हिम्मत सिंह भाटी सहित बड़ी संख्या में सरपंच, उपसरपंच और पंचायत समिति सदस्य मौजूद रहे।
धरना समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम एडीएम जितेंद्र ओझा को ज्ञापन सौंपा। मांग की गई कि पेराफेरी पंचायतों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल वार्ता कर समाधान निकाला जाए और समाधान होने तक किसी भी घर पर बुलडोज़र नहीं चलाया जाए।
उन्होंने अपनी मुख्य मांगों का जिक्र करते हुए कहा कि नगर निगम में हाल ही में शामिल पेराफेरी पंचायतों के निवासियों को 31 दिसम्बर 2024 की बसावट के आधार पर 69-ए में पट्टे जारी किए जाएं। निगम विस्तार अधिसूचना से पूर्व जिन पंचायतों में पट्टा जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, उन्हें विशेष राहत देकर निस्तारित किया जाए। यूडीए पेराफेरी क्षेत्र की जिन आराजी भूमि पर 31 दिसम्बर 2024 तक आबादी बस चुकी है, उन्हें आदेश 4.1.2022 के अनुसार पंचायत को आबादी प्रयोजनार्थ हस्तांतरित किया जाए। भौगोलिक जटिलता वाले नए शामिल गांवों को पेराफेरी क्षेत्र से बाहर निकाला जाए। बिना नोटिस टूटे मकानों के पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए तथा भविष्य में बिना सुनवाई किसी का घर न तोड़ा जाए।

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