मालेगांव ब्लास्ट केस: 17 साल बाद फैसला

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मालेगांव ब्लास्ट केस: 17 साल बाद फैसला
साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सातों आरोपी बरी
कोर्ट ने कहा- न बम वाली बाइक का मालिकाना हक साबित हुआ, न RDX की आपूर्ति का सबूत मिला

मुंबई/भोपाल। 31 जुलाई
मालेगांव ब्लास्ट केस में 17 साल बाद विशेष एनआईए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। 2008 के धमाके में 6 लोगों की मौत और 95 घायल हुए थे। लेकिन कोर्ट ने सभी 7 आरोपियों — साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, ले. कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर धर द्विवेदी — को बरी कर दिया।

कोर्ट की अहम टिप्पणियां:
बाइक साध्वी प्रज्ञा की थी, यह साबित नहीं हो सका।
बम मोटरसाइकिल में था, इसका पुख्ता सबूत नहीं।
ले. कर्नल पुरोहित ने RDX लाया या बम बनाया, इसका कोई साक्ष्य नहीं।
अभिनव भारत के फंड का उपयोग आतंकी गतिविधि में हुआ, यह भी साबित नहीं।
जांच में तकनीकी खामियां: पंचनामा अधूरा, फिंगरप्रिंट नहीं लिए गए, चेसिस नंबर नहीं मिला।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
CM मोहन यादव: “यह कांग्रेस की संकुचित मानसिकता पर करारा प्रहार है। हिंदू कभी आतंकी नहीं हो सकता।”
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष: “वोट बैंक की राजनीति के लिए कांग्रेस ने भगवा को बदनाम किया।”
उमा भारती: “आज हम गर्व से कह सकते हैं कि हिंदू समाज को कलंकित नहीं होने दिया गया।”
दिग्विजय सिंह: “हिंदू हो या मुस्लिम, कोई भी आतंकवादी नहीं हो सकता।”

पीड़ित पक्ष का पक्ष:
पीड़ित अहमद अंसारी ने कहा कि वे फैसले से बेहद दुखी हैं और हाईकोर्ट में अपील करेंगे। वकील शाहिद अंसारी ने कहा, “जांच एजेंसियां और सरकार फेल रही हैं। कोर्ट ने मुआवजा देने के निर्देश तो दिए, पर दोष साबित नहीं हो सके।”

साध्वी प्रज्ञा की प्रतिक्रिया:
“भगवा को बदनाम करने का षड्यंत्र रचा गया। आज भगवा की जीत हुई। मैं संन्यासी हूं, इसीलिए जिंदा हूं।”

ले. कर्नल पुरोहित ने कहा:
“मैं किसी एजेंसी को दोष नहीं देता, लेकिन उनके भीतर के लोग गलत कर रहे थे। आज आम आदमी का न्याय व्यवस्था में विश्वास लौटा है।”

पृष्ठभूमि:
29 सितंबर 2008 को मालेगांव (महाराष्ट्र) में एक बम धमाके में 6 लोगों की जान गई थी। शुरुआती जांच ATS ने की और 2011 में केस NIA को सौंपा गया। NIA ने 2016 में चार्जशीट दाखिल की। कुल 3 एजेंसियों और 4 जजों के बदलाव के बाद आज फैसला आया।

आगे की कार्रवाई:
पीड़ित पक्ष हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। वहीं, भाजपा इसे “हिंदुत्व की जीत” बता रही है।