विश्‍वविद्यालय एवं विद्यालय की पुस्‍तकों में परस्पर तथ्‍यात्‍मक भेद कर रहा आहत

Share

-मेवाड़ और महाराणा प्रताप से जुड़े तथ्यों में त्रुटि से इतिहासविदों के बाद अब कॉलेज प्राध्यपकों ने भी जताई चिंता

उदयपुर। 9 अगस्त
एनसीईआरटी की पुस्तकों में मेवाड़ के शौर्यपूर्ण इतिहास और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को लेकर गलत तथ्यों के उजागर होने पर मेवाड़ के इतिहासकारों के बाद अब कॉलेज में इतिहास विषय का शिक्षण कर रहे प्राध्यापकों ने भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि एक ओर महाविद्यालयों में मेवाड़ का शौर्यपूर्ण इतिहास पढ़ाया जा रहा है और कॉलेजों में इतिहास पढ़ने वाला हर विद्यार्थी यह पढ़ता है कि हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना अकबर की सेना पर भारी पड़ी और हमारे ही छोटे भाई-बहन स्कूलों में उलटा पढ़ रहे हैं। इससे न केवल वे आहत हैं, बल्कि उन्होंने भी एनसीईआरटी को पत्र लिखने की बात कही है।
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर की इतिहास संकाय की अध्यक्ष प्रोफेसर दिग्विजय भटनागर ने कहा है कि महाराणा प्रताप मध्यकालीन भारत के ही नहीं अपितु विश्व स्तर पर भारतीय इतिहास संस्कृति और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानियों के प्रेरणा स्रोत रहे हैं। शिवाजी महाराज से पूर्व महाराणा प्रताप ने स्वतंत्रता सेनानियों में स्वाधीनता की अलख जगाई थी। उन्होंने बताया कि सुखाड़िया विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप और मेवाड़ से संबंधित विस्तृत अध्ययन स्नातक एवं स्नाकोत्तर स्तर पर कराया जाता है। साथ ही, महाराणा प्रताप के जीवन, दर्शन और प्रासंगिकता पर शोध कार्य विभाग के द्वारा नियमित किया जा रहा है। महाराणा प्रताप विस्तार व्याख्यानमाला का आयोजन वर्ष 2011 से प्रतिवर्ष किया जा रहा है। महाविद्यालयीन पढ़ाई से इतर स्कूली पाठ्यपुस्तकों में अनुचित और भ्रामक तथ्यों के सामने आने से वे भी आहत हैं।
इतिहास विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मनीष श्रीमाली ने कहा कि आजादी के बाद से ही इतिहास के पाठयक्रम पर यूरोप एवं दिल्‍ली केन्द्रित इतिहास का प्रभाव बना हुआ था। महाराणा प्रताप को केवल राजस्‍थान के परिप्रेक्ष्‍य तक सीमित करने की प्रवृत्ति रही है। सुविवि के पाठ्यक्रम में पिछले कुछ सत्रों से इसे समग्र रूप से जोड़ने का प्रयास किया गया है। आज विश्‍वविद्यालय के ‘राजस्‍थान का इतिहास’वाले पेपर में तो पढ़ाया ही जाता है, साथ में ‘मध्‍यकालीन भारत’के पेपर में भी महाराणा प्रताप, महाराणा राजसिंह और राव चंद्रसेन को स्‍थान दिया गया है। हालांकि, आज भी कई विश्‍वविद्यालयों में यह पेपर दिल्‍ली केन्द्रित देखा जा सकता है। वर्तमान में स्‍कूली पाठयक्रम कि प्रामाणिक पुस्‍तकों में जो तथ्‍यात्‍मक गलती है, वह हमारे महापुरुषों के त्‍याग, बलिदान को नजरअंदाज करने वाला है। आज विश्‍वविद्यालय एवं विद्यालय की पुस्‍तकों में होने वाला तथ्‍यात्‍मक भेद छात्रों के मन में भम्र उत्‍पन्‍न कर रहा है और समाज के समक्ष इतिहास की विकृत छवि पेश कर रहा है। महाविद्यालय स्तर पर भी इतिहास के प्राध्यापकों व विद्यार्थियों की ओर से विस्तृत ऐतिहासिक तथ्यों के साथ एनसीईआरटी को पत्र लिखे जाएंगे।
गौरतलब है कि गोयल ब्रदर्स प्रकाशन की एनसीईआरटी अप्रूव्ड कक्षा 7 की पुस्तक में महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी के युद्ध में पराजित बताया गया है, वहीं एनसीईआरटी की ही कक्षा-8 की पुस्तक में “मराठा साम्राज्य”शीर्षक के मानचित्र में मेवाड़ सहित सभी तत्कालीन राजपूत रियासतों को मराठा साम्राज्य के अधीन एक प्रशासनिक इकाई दर्शाया गया है, जो दोनों ही तथ्यात्मक रूप से गलत है। इसके लिए नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ और राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद ग्लोबल हिस्ट्री फोरम से जुड़े इतिहासकारों ने सही तथ्य ऐतिहासिक संदर्भों के साथ लिखते हुए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री, एनसीईआरटी निदेशक, राजस्थान के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखने का निर्णय किया है।