साइबर ठगी के शिकार को न्याय, बैंक खातों से रकम लौटाने का आदेश

Share

मावली कोर्ट का अहम आदेश: पीड़ित को लंबे समय तक वंचित नहीं रखा जा सकता
मावली, 18 दिसंबर
: साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों को राहत देने की दिशा में मावली न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। मावली कोर्ट संख्या-2 के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहितास सिंह पंवार ने साइबर फ्रॉड का शिकार हुए एक व्यक्ति की फ्रीज की गई राशि उसे वापस सौंपने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि पीड़ित को उसकी मेहनत की कमाई से अनावश्यक रूप से लंबे समय तक वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।
यह मामला घासा थाना क्षेत्र के मानसील निवासी रमेशचंद्र कुमावत से जुड़ा है। इसके अनुसार अज्ञात साइबर ठगों ने मोबाइल हैक कराने की चाल अपनाकर उनके बैंक खाते से 1 लाख 59 हजार 998 रुपए की धोखाधड़ी की। ठगी की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और इसके बाद घासा थाने में भी मामला दर्ज कराया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। साइबर क्राइम की सूचना मिलने पर संबंधित बैंकों के नोडल अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन खातों में मौजूद राशि को होल्ड (फ्रीज) कर दिया। हालांकि, मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण राशि लंबे समय से फंसी हुई थी।
पीड़ित की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता मिथिलेश पगारिया ने अदालत को बताया कि होल्ड की गई राशि स्पष्ट रूप से प्रार्थी की है और फिलहाल उस पर किसी अन्य व्यक्ति का दावा नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि मुकदमे के निस्तारण में समय लग सकता है, ऐसे में पीड़ित को उसकी राशि का उपयोग करने से रोका जाना अन्यायपूर्ण होगा।
न्यायालय ने कहा कि प्रचलित मुद्रा को लंबे समय तक फ्रीज रखना उचित नहीं है। अदालत ने आदेश दिया कि प्रार्थी द्वारा 1 लाख 40 हजार रुपए को डिफ्रीज कर राशि उनके मूल खाते में स्थानांतरित की जाए।