प्रदेश के 200 बूढ़े बांधों को मिलेगी मजबूती

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प्रथम चरण में 300 करोड़ से होगा काम, उदयपुर संभाग के कई जलाशय शामिल
उदयपुर, 27 फरवरी (संदीप कुमावत):
प्रदेश में वर्षों पुराने और जर्जर हो चुके बांधों को अब नई मजबूती मिलने जा रही है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रथम चरण के तहत लगभग 200 बांधों के सुदृढ़ीकरण के लिए 300 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। योजना का उद्देश्य जल संचयन क्षमता बढ़ाना, सिंचाई तंत्र को मजबूत करना और बांध सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत का कहना है कि इस अभियान के तहत कमजोर पाल को सुदृढ़ करना, टूटी नहरों की मरम्मत, जलाशयों से गाद निकालना तथा रिसाव रोकने जैसे कार्य किए जाएंगे। डीआरआईपी (डैम रिहैबिलिटेशन एंड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट) फेज द्वितीय व तृतीय में विश्व बैंक और एआईआईबी के सहयोग से 10 वर्षों में 736 बांधों के पुनर्वास की योजना में राजस्थान भी शामिल है।
प्रमुख बांधों में बीसलपुर बांध (टोंक), जवाई बांध (पाली), माही बजाज सागर बांध (बांसवाड़ा) और सोम कमला आंबा बांध शामिल हैं। उदयपुर संभाग के छापी, सुकली सेलवाड़ा, गंभीरी व मातृकुंडिया बांध भी योजना में लिए गए हैं। टोंक जिले के मालपुरा स्थित 140 वर्ष पुराने टोरड़ी सागर बांध के नहरी तंत्र को मजबूत करने हेतु ईआरसीपी के अंतर्गत 100 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।
सदियों पुराने बांध आज भी मजबूत
राजस्थान में राजसमंद झील, जयसमंद झील और फतहसागर झील जैसे बांध 300-400 वर्षों से अधिक समय से टिके हैं, जो पारंपरिक निर्माण तकनीक और बेहतर रखरखाव का उदाहरण हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक भारत में 1,115 से अधिक बड़े बांध 50 वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे।
राजस्थान के प्रमुख बांधों और उनकी स्थापना वर्ष
जवाई बांध – 1956
मोरेल बांध – 1959
माही बजाज सागर बांध – 1983
बीसलपुर बांध – 1999
मातृकुंडिया बांध – 1981
जवाहर सागर बांध – 1973