कश्मीरी छात्रों सहित फाइनल ईयर स्टूडेंट्स ने भविष्य से खिलवाड़ का लगाया आरोप
उदयपुर, 12 फरवरी: चित्तौड़गढ़ स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बी.एससी. नर्सिंग फाइनल ईयर के 30 कश्मीरी छात्रों समेत कुल 33 विद्यार्थियों को बुधवार को सस्पेंड कर दिया गया। सस्पेंशन के बाद से छात्र यूनिवर्सिटी परिसर में धरने पर बैठे हैं और कोर्स की मान्यता को लेकर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी ने बी.एससी. नर्सिंग कोर्स के लिए राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से अब तक मान्यता नहीं ली है। मान्यता के बिना उनकी डिग्री वैध नहीं मानी जाएगी, जिससे उनका पंजीकरण और नौकरी दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
पहले भी दिया गया था लिखित आश्वासन
कश्मीर निवासी छात्र अबरार ने बताया कि वे 2022 बैच के छात्र हैं और मार्च में फाइनल परीक्षा होनी है। इससे पहले 2024 में भी छात्रों ने इसी मुद्दे पर विरोध किया था। उस समय प्रबंधन ने कोर्ट में लिखित आश्वासन दिया था कि 4 दिसंबर 2024 तक मान्यता नहीं मिलने पर छात्रों को किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी में उसी स्कॉलरशिप पर शिफ्ट किया जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
धरने के दौरान पुलिस से भी झड़प
धरने की सूचना मिलने पर गंगरार थाना पुलिस मौके पर पहुंची थी। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। गंगरार थानाधिकारी श्यामाराम ने बताया कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं और अभी तक किसी भी पक्ष ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है।
50 से अधिक छात्रों का भविष्य दांव पर
छात्रों का दावा है कि इस विवाद से केवल 33 नहीं बल्कि 50 से ज्यादा विद्यार्थी प्रभावित हो सकते हैं। यदि मान्यता नहीं मिली तो उनकी डिग्री पर सवाल खड़े होंगे और वे सरकारी या निजी अस्पतालों में नर्सिंग पंजीकरण नहीं करा सकेंगे। छात्रों ने मांग की है कि जल्द मान्यता दिलाई जाए या उन्हें किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में स्थानांतरित किया जाए। वहीं, यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।