4 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा गया था आरोपी, 20 हजार रुपए का जुर्माना भी
उदयपुर, 7 फरवरी : भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों की विशेष अदालत (संख्या-1) ने 15 साल पुराने रिश्वत प्रकरण में बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन हेड कांस्टेबल वखत सिंह को दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश मनीष अग्रवाल ने अभियुक्त को भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं में कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई। अदालत ने टिप्पणी की कि लोक सेवकों द्वारा अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन न कर भ्रष्ट आचरण अपनाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना आवश्यक है।
विशिष्ट लोक अभियोजक राजेश पारीक के मुताबिक यह मामला वर्ष 2011 का है, जब डूंगरपुर जिले की वैजा पुलिस चौकी में तैनात वखत सिंह एक झगड़े की जांच कर रहे थे। परिवादी मणीलाल ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने मारपीट के मामले में रिपोर्ट से नाम हटाने के बदले ₹5000 की मांग की, जो बाद में ₹4000 में तय हुई।
एसीबी ने 2 अप्रैल 2011 को जाल बिछाकर आरोपी को ₹4000 लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में 13 गवाह और 30 दस्तावेज प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों में बहस के बाद कोर्ट ने आरोपी वखत सिंह को दोषी माना और धारा 7 में एक वर्ष का कारावास व ₹10,000 जुर्माना तथा धारा 13(1)(डी)/13(2) में भी एक वर्ष का कारावास व ₹10,000 जुर्माना लगाया। ट्रैप राशि अपील अवधि के बाद परिवादी को लौटाने के आदेश दिए गए हैं।