थाने में एक घंटे तड़पता रहा मजदूर युवक, दम तोड़ा

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लूटेरों ने किया चाकू से हमला, घायल युवक बार-बार कह रहा था कि ‘जल्द मुझे हॉस्पिटल ले चलो, मैं मर जाऊंगा।’
चाकूबाजी के बाद इलाज में देरी, परिजनों ने किया प्रदर्शन
उदयपुर, 5 फरवरी:
शहर के सवीना थाना क्षेत्र में लूटपाट की कोशिश के दौरान चाकू से घायल मजदूर युवक की मौत के बाद पुलिस और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घायल युवक प्रेम गमेती (32) थाने के बाहर एम्बुलेंस में करीब एक घंटे तक दर्द से तड़पता रहा और बार-बार कहता रहा— “जल्द मुझे हॉस्पिटल ले चलो, मैं मर जाऊंगा।” लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार विजय सिंह पथिक नगर निवासी प्रेम गुरुवार सुबह करीब 4 बजे कृषि मंडी जा रहा था। सेक्टर-8 रेलवे लाइन के पास तीन बदमाशों ने उसे घेरकर लूट का प्रयास किया। विरोध करने पर आरोपियों ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया और फरार हो गए। राहगीर की सूचना पर पुलिस और परिजन प्रेम को पहले सेटेलाइट हॉस्पिटल ले गए, जहां से उसे एमबी हॉस्पिटल रेफर किया गया। आरोप है कि एमबी हॉस्पिटल में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाने भेज दिया।
परिजन घायल को एम्बुलेंस में लेकर सवीना थाने पहुंचे, लेकिन वहां रिपोर्ट लिखने में देरी हुई और प्रेम दर्द से कराहता रहा। स्थिति बिगड़ने पर उसे दोबारा एमबी हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं।
मौत के बाद परिजनों ने एमबी हॉस्पिटल के बाहर प्रदर्शन कर डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया और मुआवजे व कार्रवाई की मांग की।
थानाधिकारी लादूराम ने बताया कि हमला लूट की नीयत से किया गया था। आरोपियों की तलाश के लिए चार टीमें गठित की गई हैं। वहीं अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन ने डॉ. अखिलेश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है।


सिस्टम ने कर दी हत्या..!


उदयपुर की यह घटना सिर्फ एक युवक की मौत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता का आईना है। प्रेम गमेती चाकूबाजी का शिकार हुआ, लेकिन उसकी जान हमलावरों से ज्यादा स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिस प्रक्रिया की देरी ने ले ली। एक घायल युवक एम्बुलेंस में थाने के बाहर तड़पता रहा और सिस्टम फाइलों, औपचारिकताओं और रिपोर्ट की प्रक्रिया में उलझा रहा। सवाल यह है कि पहले इलाज जरूरी है या कागजी कार्रवाई?
जब अस्पताल प्राथमिक उपचार के बाद घायल को थाने भेज दे और थाने में रिपोर्ट दर्ज करने में एक घंटा लग जाए, तो यह सीधी लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता है। प्रेम बार-बार कहता रहा कि “मैं मर जाऊंगा”, और सच में मर गया। यह मौत अपराधियों की नहीं, सिस्टम की देन है। अगर समय पर इलाज मिलता, तो शायद एक जिंदगी बच सकती थी।