चेक अनादरण के मामले में आरोपी को एक साल की कैद

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₹2,59,000 की राशि बतौर हर्जाना देने के आदेश
उदयपुर, 3 फरवरी :
न्यायिक मजिस्ट्रेट (एनआई एक्ट केसेज) उदयपुर की पीठासीन अधिकारी रेनू मोटवानी ने चेक अनादरण (चेक बाउंस) के एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अभियुक्त को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने अभियुक्त शांतिलाल शर्मा को एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है और परिवादी को ₹2,59,000 बतौर हर्जाना देने का आदेश दिया है।
पीड़ित पक्ष के एडवोकेट बंशीलाल गवारिया ने बताया कि अभियुक्त शांतिलाल ने अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं के लिए परिवादी मदनलाल माली से ₹2,20,000 नकद उधार लिए थे। इस राशि के पुनर्भुगतान के लिए अभियुक्त ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (तत्कालीन कॉर्पोरेशन बैंक) का एक चेक जारी किया था। जब परिवादी ने यह चेक बैंक में लगाया, तो यह खाते में राशि नहीं होने पर अनादरित हो गया। जिसको लेकर दिए परिवाद के बाद सुनवाई के दौरान अभियुक्त ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाने की बात कही, लेकिन वह अपनी ओर से कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि धारा 138 एन.आई. एक्ट का अपराध न केवल व्यक्ति विशेष बल्कि बैंकिंग व्यवस्था और आर्थिक ढांचे के विरुद्ध भी है। चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार करने के बाद यह माना जाता है कि वह कानूनी देनदारी चुकाने के लिए ही दिया गया था।
अदालत ने अभियुक्त को दोषी मानते हुए एक वर्ष की जेल की सजा सुनाई । इसके साथ ही, धारा 357(3) CrPC के तहत परिवादी को ₹2,59,000 का प्रतिकर देने के भी निर्देश दिए।