‘मॉडल हिल पॉलिसी’ की आड़ में कट रही अरावली

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उदयपुर, 17 फरवरी: अरावली पर्वतमाला में पहाड़ियों की अंधाधुंध कटाई और अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने सरकार से गारंटी मांगी है कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह का अवैध खनन और पहाड़ियों की कटाई नहीं होने दी जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों से उलट नजर आ रही है।
उदयपुर और राजसमंद की सीमा पर स्थित चीरवा, कैलाशपुरी और आसपास के इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर पहाड़ियों को काटा जा रहा है। यहां बहुमंजिला होटल, रिजॉर्ट और आलीशान विला तेजी से खड़े किए जा रहे हैं, जिससे अरावली का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ता जा रहा है।
हिल पॉलिसी का उल्लंघन, ढलान पर निर्माण प्रतिबंधित
राजस्थान सरकार की ‘मॉडल हिल पॉलिसी’ के अनुसार 15 डिग्री से अधिक ढलान वाली पहाड़ियों पर किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद पहाड़ियों की चोटियों को समतल कर निर्माण कार्य जारी हैं, जो सीधे तौर पर पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है। वर्ष 2025 में कैलाशपुरी को यूडीए में शामिल कर नए नियम लागू किए गए थे, लेकिन निर्माणकर्ता पंचायत और तहसील स्तर की पुरानी अनुमतियों का सहारा लेकर निर्माण कार्य आगे बढ़ा रहे हैं। मोरिंगा वैली और टोल प्लाजा के पास अब तक 150 से अधिक विला बन चुके हैं। पहाड़ियों पर खड़ी बहुमंजिला इमारतें पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं। उदयपुर कलेक्टर नमित मेहता ने कहा कि नियम उल्लंघन पर विला सीज किए जाएंगे। वहीं राजसमंद कलेक्टर अरुण कुमार हसीना ने निगरानी दल गठित कर सख्त कार्रवाई की बात कही है।