सुबह—दोपहर शास्त्रीय संगीत ने बिखेरा सुकुन, शाम को अफ्रो पॉप और रॉक ने भरा जोश

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वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल 2026 के दूसरे दिन वैश्विक संगीत का अनूठा संगम
उदयपुर, 7 फरवरी:
झीलों की नगरी उदयपुर एक बार फिर संगीत की मधुर गूंज से सराबोर हो उठी, जब वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल 2026 के दूसरे दिन शास्त्रीय सुकून से लेकर अफ्रो-पॉप और इलेक्ट्रॉनिक बीट्स तक का अद्भुत सांस्कृतिक संगम देखने को मिला। “म्यूज़िक विदाउट बॉर्डर्स” के दस वर्षों के उत्सव के तहत आयोजित यह आयोजन हिंदुस्तान ज़िंक के सहयोग से तथा सहर द्वारा परिकल्पित व प्रस्तुत किया गया।


सुबह का सत्र: झील किनारे शास्त्रीय संगीत की शांति
दिन की शुरुआत मांझी घाट (अमराई घाट) पर शांत सुबह के सत्र से हुई। पिचोला झील के किनारे राधा बुबुक्वार ने हल्के शास्त्रीय संगीत से वातावरण को सुकून भरा बना दिया। इसके बाद फ्रांस की लेस इतिनेरेंटेस की अकापेला प्रस्तुति ने वैश्विक रंग जोड़ते हुए सुबह को ध्यानमय अनुभव में बदल दिया।
दोपहर की प्रस्तुति: फतेहसागर पाल पर भावनाओं की लहर
दोपहर के सत्र फतेहसागर पाल पर आयोजित हुए, जहां संगीत और प्रकृति का सुंदर मेल दिखा। अमृत रामनाथ की आधुनिक शास्त्रीय प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इसके बाद केप वर्डे की लुसिबेला ने मोर्ना और कोलाडेरा गीतों के जरिए आत्मीयता और गहराई जोड़ी। समापन ताबा चाके की भावनात्मक लोक-प्रेरित धुनों से हुआ, जिसने दर्शकों से गहरा जुड़ाव बनाया।


शाम का रंग: गांधी ग्राउंड में अफ्रो-पॉप और आधुनिक बीट्स का धमाल
शाम ढलते ही गांधी ग्राउंड जीवंत वैश्विक मंच बन गया। कैमरून की वैलेरी एकोउमे ने अफ्रो-पॉप और अफ्रो-रॉक की ऊर्जा से जोश भर दिया। इसके बाद OAFF के इलेक्ट्रॉनिक साउंडस्केप्स ने समकालीन रंग जोड़ा। बहुप्रतीक्षित जोनिता गांधी की दमदार प्रस्तुति ने दूसरे दिन को यादगार समापन तक पहुंचाया। हिंदुस्तान ज़िंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि यह मंच उदयपुर को वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। वहीं सहर के संस्थापक संजीव भार्गव ने इसे “विविधता, खोज और संगीत संवाद की जीवंत यात्रा” बताया।
तीसरे दिन भी होंगी भव्य प्रस्तुतियां
फेस्टिवल का तीसरा दिन मांझी घाट पर सुबह 9 बजे से शुरू होगा, दोपहर 3 बजे फतेहसागर पाल और शाम 6 बजे गांधी ग्राउंड पर भव्य प्रस्तुतियों के साथ इसका शानदार समापन होगा।