गो-आधारित खेती सतत विकास का आधार: गजेंद्र सिंह

Share

उदयपुर में 22 साल बाद तीन दिवसीय क्षेत्रीय कृषि मेला शुरू
उदयपुर, 7 फरवरी:
भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग रही है। खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारत माता और धरती माता की पूजा व आराधना का माध्यम है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को सशक्त बनाने में गो-आधारित कृषि की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
वे शनिवार को राजस्थान कृषि महाविद्यालय के खेल मैदान पर 22 साल बाद आयोजित तीन दिवसीय क्षेत्रीय कृषि मेले के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह मेला महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) एवं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है। मेले में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमन-दीव तथा दादर-नगर हवेली के किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषक उत्पादक संगठन, कृषि उद्यमी और कृषि कंपनियां भाग ले रही हैं।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए एमपीयूएटी के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह धाकड़ ने किसानों से विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत बीज, जल संरक्षण तकनीक, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली एवं आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही युवाओं को कृषि उद्यमिता अपनाकर स्वरोजगार के अवसर सृजित करने की प्रेरणा दी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक डॉ. एसके शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से तकनीकी ज्ञान किसानों तक पहुंचता है। निदेशक (अटारी) डॉ. जेपी मिश्रा ने गो-आधारित व समन्वित खेती मॉडल अपनाने का संदेश दिया।
वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी एवं शहर विधायक ताराचंद जैन ने किसानों को नवीन तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। समारोह में “सफल कृषि उद्यमी” पुस्तक का विमोचन हुआ तथा दूरदर्शन के अधिकारियों को सम्मानित किया गया। रबी फसल प्रतियोगिता में बांसवाड़ा के मोहनलाल, प्रतापगढ़ के राजेंद्र, राजसमंद के लाल सिंह एवं बांसवाड़ा के मांगेलाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।