आम आदमी, किसान और कारोबारियों को राहत देने की तैयारी
नई दिल्ली, 15 अगस्त: आयकर में राहत के बाद अब केंद्र सरकार जीएसटी ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी में है। इसका उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को बढ़ावा देना है। प्रस्ताव के तहत जीएसटी की मौजूदा चार दरों (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर सिर्फ दो दरें – 5% और 18% – कर दी जाएंगी। इससे रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती होंगी और मिडिल क्लास को बड़ा फायदा मिलेगा।
गरीब और मिडिल क्लास को राहत
सरकार के मुताबिक, 12% स्लैब की अधिकतर वस्तुएं 5% में और 28% की 90% वस्तुएं 18% स्लैब में लाई जाएंगी। इससे टीवी, फ्रिज, एसी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतें लगभग 10% घटेंगी। साथ ही खेती में उपयोग होने वाली मशीनों और दवाओं पर भी टैक्स कम होगा। हेल्थ इंश्योरेंस, शिक्षा से जुड़े उत्पाद और जांच उपकरणों पर भी राहत मिलेगी।
तंबाकू और गुटखा पर कोई राहत नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पान मसाला, गुटखा और अन्य हानिकारक उत्पादों पर टैक्स में कोई राहत नहीं मिलेगी। इन पर 40% तक जीएसटी जारी रहेगा। साथ ही ऑनलाइन गेमिंग को भी नुकसानदेह श्रेणी में रखते हुए उस पर ऊंचा टैक्स लगाया जा सकता है।
कारोबारियों को प्रक्रियागत राहत
जीएसटी की दरों के साथ-साथ उसके प्रारूप और प्रक्रिया को भी सरल किया जाएगा। रजिस्ट्रेशन को आसान बनाया जाएगा, अनावश्यक नोटिस बंद होंगे और निर्यातकों को तुरंत रिफंड मिलेगा। इनपुट टैक्स क्रेडिट की जटिलता दूर करने के लिए कच्चे माल और तैयार माल की दरों में समानता लाई जाएगी।
शुरुआत में कम हो सकता है राजस्व
सरकार मानती है कि दरों में बदलाव के कारण शुरुआती तौर पर जीएसटी संग्रह में गिरावट हो सकती है। लेकिन वस्तुएं सस्ती होने से खपत बढ़ेगी, जिससे लंबे समय में राजस्व में वृद्धि होगी। क्षतिपूर्ति सेस भी मार्च 2026 तक समाप्त किया जाएगा।
राज्यों की सहमति जरूरी
यह प्रस्ताव सभी राज्यों को भेजा गया है। अंतिम फैसला जीएसटी काउंसिल लेगी, जिसमें सभी राज्यों की सहमति जरूरी है। यदि कुछ राज्य विरोध करते हैं तो जनता में यह संदेश जाएगा कि वे आम आदमी को राहत नहीं देना चाहते।