उदयपुर में आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक शुरू
उदयपुर, 15 फरवरी: आदिवासी अधिकारों और पहचान के सवाल पर देशभर से जुटे प्रतिनिधियों की मौजूदगी में आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय समन्वय समिति की दो दिवसीय बैठक रविवार को गुजराती समाज भवन में शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता त्रिपुरा के नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने की। इसमें राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, असम, केरल और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
पत्रकार वार्ता में जितेंद्र चौधरी ने कहा कि सरकार का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ है, लेकिन नीतिगत फैसलों में आदिवासियों की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने बताया कि देश की आबादी में आदिवासियों की हिस्सेदारी 8.6% होने के बावजूद केंद्रीय बजट में उनके लिए महज 2.58% प्रावधान है। मनरेगा को कमजोर किए जाने और रोजगार के वादों पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
“आदिवासी पहचान मिटाने की कोशिश”
राष्ट्रीय संयोजक पुलिन बास्के ने आरोप लगाया कि आरएसएस-भाजपा सरकार आदिवासी अधिकारों पर बुलडोजर चला रही है। उन्होंने जनगणना में ‘आदिवासी आस्था कोलम’ शामिल करने और मुक्त व्यापार समझौतों से होने वाले नुकसान के खिलाफ संघर्ष का ऐलान किया।
राजस्थान में अघोषित युद्ध का आरोप
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वृंदा करात ने कहा कि राजस्थान में विस्थापन, निजीकरण और आरक्षण उल्लंघन के जरिए आदिवासियों के खिलाफ अघोषित युद्ध छेड़ा गया है। राज्य अध्यक्ष दुलीचंद ने अरावली पर्वतमाला को खनन माफिया से बचाने और अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की। बैठक में आगामी आंदोलनात्मक कार्यक्रमों पर भी निर्णय लिए जाएंगे।