भारत ने सऊदी-PAK डिफेंस समझौते पर जताई चिंता

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आतंकवाद और सुरक्षा पर मजबूत रुख, चाबहार पोर्ट और कनाडा मामलों पर भी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली, 19 सितम्बर : भारत ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल ही में हुए रक्षा समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हमें उम्मीद है कि सऊदी अरब हमारे साथ अपने रिश्तों और संवेदनशीलता का ध्यान रखेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।
जायसवाल ने पाकिस्तान और आतंकवादियों के संबंधों को लेकर कहा कि दुनिया पाकिस्तानी सेना और आतंकियों की साठगांठ अच्छी तरह जानती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समुदाय को एकजुट होकर कठोर कदम उठाने होंगे।
साथ ही उन्होंने ईरान के चाबहार पोर्ट के मामले का उल्लेख किया। अमेरिका ने पोर्ट को मिली छूट समाप्त कर दी है, जिससे 29 सितंबर से इससे जुड़ी कंपनियों पर जुर्माना लगेगा। भारत फिलहाल इसके प्रभाव का आकलन कर रहा है।
जायसवाल ने कनाडा में भारतीय मिशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जाने की जानकारी दी। हाल ही में कनाडा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने भारत के NSA से चर्चा की।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान-सऊदी समझौता औपचारिक ‘संधि’ नहीं, लेकिन गंभीर रणनीतिक साझेदारी मानी जा रही है। यह समझौता दो देशों के बीच पहले से मौजूद संबंधों को औपचारिक रूप देता है। इसके संभावित प्रभाव, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ सकते हैं।
इतिहास में पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ भी इसी तरह का म्यूचुअल डिफेंस असिस्टेंस एग्रीमेंट (1954) किया था, जिसमें सामूहिक सुरक्षा और सैन्य सहायता का प्रावधान था। इसके तहत पाकिस्तान को हथियार, प्रशिक्षण और रणनीतिक सहयोग दिया गया था।
भारत ने स्पष्ट किया कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक समुदाय से प्रयास बढ़ाने का आह्वान किया।