दक्षिणी राजस्थान में सिंचाई कर वसूली फेल, 32 करोड़ बकाया

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जल उपयोक्ता संगमों की कमजोर कार्यप्रणाली से सरकार को राजस्व नुकसान
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 13 जनवरी:
राजस्थान में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से गठित जल उपयोक्ता संगम (वाटर यूज़र एसोसिएशन) सिंचाई कर की वसूली के मामले में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सके हैं। प्रदेशभर में इन संगमों के माध्यम से सिंचाई कर की प्रभावी वसूली नहीं हो पाने के कारण करीब 32 करोड़ रुपए की राशि बकाया हो गई है। इससे राज्य सरकार के राजस्व पर सीधा असर पड़ा है और सिंचाई विभाग की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
स्थानीय प्रबंधन का उद्देश्य, लेकिन नतीजे कमजोर
राज्य के नहर, बांध और लिफ्ट सिंचाई परियोजना क्षेत्रों में किसानों से सिंचाई कर वसूलने और उसे विभाग में जमा कराने की जिम्मेदारी जल उपयोक्ता संगमों को दी गई थी। इसका मकसद स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन को मजबूत करना, पानी का समान वितरण सुनिश्चित करना और सरकारी तंत्र पर निर्भरता कम करना था। लेकिन जमीनी हकीकत में कई संगम अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं निभा पाए।
सूखा, फसल नुकसान और क्षमता की कमी
सूत्रों के अनुसार कई क्षेत्रों में किसानों ने सूखा, फसल नुकसान और आर्थिक तंगी का हवाला देकर सिंचाई कर जमा नहीं कराया। वहीं, अनेक संगमों के पास न तो पर्याप्त प्रशासनिक क्षमता है और न ही वसूली के लिए प्रभावी तंत्र। सिंचाई कर की दरों को लेकर किसानों में असंतोष भी सामने आया है, जिससे वसूली और कमजोर हुई।
योजनाओं पर पड़ा असर
बकाया राशि का सीधा असर सिंचाई विभाग के कार्यों पर पड़ा है। नहरों के रखरखाव, मरम्मत, गाद निकासी और नई संरचनाओं के निर्माण जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि समय पर कर वसूली न होने से बजट प्रबंधन में भारी दिक्कतें आ रही हैं।
सरकार सख्ती के मूड में
सरकार अब इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने के संकेत दे रही है। बकाया वसूली के लिए जल उपयोक्ता संगमों की समीक्षा, ऑडिट और निष्क्रिय संगमों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। साथ ही, वसूली प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने तथा किसानों को जागरूक करने पर भी विचार किया जा रहा है।
27 साल से नहीं बढ़ा सिंचाई शुल्क
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने खेतों की सिंचाई के लिए जो शुल्क 27 मई 1999 को प्रति फसल प्रति बीघा तय किया था, उसमें अब तक कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। यह शुल्क नाममात्र का होने के बावजूद वसूली चुनौती बनी हुई है। अब विभाग जल उपयोक्ता संगमों के अध्यक्षों पर आयबाना वसूली के लिए दबाव बना रहा है।
जवाबदेही की आवश्यकता
सेवानिवृत्त सहायक अभियंता बी. पांचाल का कहना है कि यदि संगमों को तकनीकी व प्रशासनिक सहयोग, नियमित प्रशिक्षण और स्पष्ट जवाबदेही दी जाए, तो न केवल बकाया वसूली सुधर सकती है, बल्कि प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था भी अधिक टिकाऊ बन सकती है। वहीं, मुख्य अभियंता वीरेंद्र सिंह सागर के अनुसार अब कर वसूली के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय कर जिम्मेदारी अधीनस्थ अधिकारियों को सौंपी जा रही है।