बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता की उम्रकैद बरकरार

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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी— “क्या केवल बेटी होना ही मेरा दोष है?”, पीड़िता को 7 लाख मुआवजा
जोधपुर, 6 मार्च:
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने नाबालिग सगी बेटी से दुष्कर्म के मामले में आरोपी पिता (52) को दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने इसे समाज की नैतिक चेतना और बाल गरिमा से जुड़ा गंभीर अपराध बताते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी। साथ ही राज्य सरकार को पीड़िता को 7 लाख रुपए मुआवजा देने के निर्देश दिए।
जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के 13 अक्टूबर 2023 के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि आरोपी ने पिता जैसे पवित्र रिश्ते के विश्वास का घोर दुरुपयोग किया है।
मामले के अनुसार पीड़िता की मां के दूसरी जगह चले जाने के बाद वह पिता के साथ अकेली रहती थी। इसी का फायदा उठाकर आरोपी करीब डेढ़ साल तक बेटी से दुष्कर्म करता रहा। एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान पीड़िता ने अपनी आपबीती चचेरी बहन को बताई। बहन की सलाह पर पीड़िता ने सबूत जुटाने का निर्णय लिया और पिता की हरकत का मोबाइल से वीडियो बना लिया। इसके बाद 27 मार्च 2023 को एफआईआर दर्ज कराई गई।
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दावा किया कि पिता शारीरिक रूप से संबंध बनाने में अक्षम है और यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है। हालांकि हाईकोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए वीडियो साक्ष्य को विश्वसनीय माना।
फैसले में अदालत ने कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर गहरा आघात पहुंचाते हैं। कोर्ट ने मार्मिक टिप्पणी करते हुए कहा— “आज भी समाज में कई बेटियां पीड़ा सह रही हैं और एक सवाल हवा में गूंजता है।