बैंक खाता बेचने वाला आरोपी गिरफ्तार, बैंक खाता बेचकर ठगों की मदद की; खरीदार की तलाश जारी
\उदयपुर, 15 फरवरी: मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के एक रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारी को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर करीब 68 लाख रुपये की साइबर ठगी का शिकार बनाया गया। मामले में पुलिस ने दूसरे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसने अपना बैंक खाता साइबर ठगों को बेचकर इस अपराध में सहयोग किया था।
साइबर क्राइम डीएसपी विनय चौधरी ने बताया कि आरोपी सुखराम (23) पिता करनाराम निवासी खींवसर (नागौर) को पकड़ा गया है। पूछताछ में सामने आया कि उसने अपना बैंक खाता ठगों को बेचा था। खाता खरीदने वाले एक अन्य आरोपी को नामजद किया गया है, जिसकी तलाश जारी है। इससे पहले आरोपी यादवेंद्र सिंह को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
वीडियो कॉल पर फर्जी CBI अफसरों ने फंसाया
पीड़ित भरत व्यास निवासी न्यू केशवनगर, जो एमएलएसयू के पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं, और उनकी पत्नी आशा व्यास को ठगों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए जाल में फंसाया। 28 दिसंबर 2025 को कॉल कर कहा गया कि उनके खिलाफ शिकायत दर्ज है।
इसके बाद एक व्यक्ति ने खुद को दिल्ली CBI से “लक्ष्मण” बताते हुए मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी। फिर ज्वाइंट कॉल में समाधान पंवार नामक व्यक्ति को जोड़ा गया, जिसने खुद को CBI दिल्ली ब्रांच का एएसपी बताया।
फर्जी मजिस्ट्रेट ने कोर्ट अकाउंट में पैसे जमा कराने को कहा
ठगों ने संपत्ति, बैंक बैलेंस और जेवरात की जानकारी ली और फिर एक फर्जी मजिस्ट्रेट से कॉल करवाया। मजिस्ट्रेट ने कहा कि वे दोषी पाए गए हैं और जमानत के लिए तुरंत 11.90 लाख रुपये कोर्ट के खाते में जमा कराने होंगे।
इस तरह डर और दबाव में पति-पत्नी लगातार रकम ट्रांसफर करते रहे और कुल 67.90 लाख रुपये गंवा बैठे। पुलिस मामले में आगे जांच कर रही है।