सरकारी अस्पतालों में बाहर की दवा लिखने पर सख्ती, दोषी डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई

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उदयपुर, 14 जनवरी : राजस्थान सरकार ने सरकारी चिकित्सा संस्थानों में मरीजों को बाहर की दवाएं लिखे जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय, राजस्थान जयपुर ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि राजकीय अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सक आवश्यक दवा सूची (EDL) में शामिल दवाओं के अलावा बाहर की दवाएं नहीं लिखेंगे। आदेश की अवहेलना करने पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ राजस्थान सेवा नियम 1958 के नियम 17 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
निदेशालय द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना (दवा) के तहत प्रदेश के सभी राजकीय चिकित्सा संस्थानों में मरीजों को नि:शुल्क दवाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक दवाओं को EDL में सूचीबद्ध किया गया है। यदि किसी कारणवश सूचीबद्ध दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं होती है तो स्थानीय क्रय (Local Purchase) के माध्यम से मरीजों को वही दवा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
इसके बावजूद विभाग के संज्ञान में आया है कि कुछ चिकित्सक मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं, जिससे सरकार की निःशुल्क दवा योजना के उद्देश्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। आदेश में इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा गया है कि इससे आमजन को आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
निदेशालय ने प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने अधीनस्थ राजकीय चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत सभी चिकित्सकों को स्पष्ट रूप से पाबंद करें कि EDL में शामिल दवाओं के अलावा किसी भी स्थिति में बाहर की दवाएं न लिखी जाएं।
आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि निर्देश जारी होने के बाद भी किसी चिकित्सक द्वारा मरीज को बाहर की दवा लिखी जाती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा जाना सुनिश्चित किया जाए।
सरकार के इस कदम को निःशुल्क दवा योजना को प्रभावी बनाने और मरीजों को आर्थिक राहत देने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है, जिससे सरकारी अस्पतालों में इलाज की पारदर्शिता और भरोसा दोनों मजबूत होंगे।