टेंडर में फर्जी दस्तावेज साबित, 10 माह बाद भी सरकार मौन

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आरएनटी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य पर कार्रवाई ठंडी बस्ते में, 12 मार्च को है सेवानिवृत्ति
उदयपुर, 27 फरवरी:
आईवीएफ सेटअप की टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी साबित होने के दस माह बाद भी आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विपिन माथुर के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। जांच में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर स्वीकृत करने के तथ्य सामने आने के बावजूद मामला फाइलों में अटका हुआ है, जबकि प्राचार्य का कार्यकाल 12 मार्च को पूरा होने जा रहा है।
3 करोड़ से अधिक के बजट में अनियमितता
प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहली बार आईवीएफ सेंटर स्थापित करने की योजना के तहत उदयपुर में डीएमएफटी योजना से तीन करोड़ 50 हजार रुपए का बजट स्वीकृत हुआ था। शिकायत के बाद चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की जांच में गंभीर खामियां उजागर हुईं। 24 अप्रैल 2025 को आयुक्त इकबाल खान ने प्राचार्य को निर्देश दिए थे कि संबंधित फर्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए, कार्यादेश निरस्त किया जाए, भुगतान रोका जाए और फर्म को ब्लैकलिस्ट कर री-टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाए।
तकनीकी आपत्तियों के बावजूद टेंडर स्वीकृत
तकनीकी समिति की रिपोर्ट में वित्तीय सलाहकार ने टेंडर को नियमानुसार न मानते हुए नियत तिथि के बाद प्रस्तुत किया जाना दर्ज किया था। बावजूद इसके टेंडर स्वीकार कर लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म ने मूल निविदा में जिन कंपनियों के ओईएम प्रमाण पत्र लगाए थे, बाद में उन्हें बदल दिया गया—जिससे पूर्व दस्तावेज फर्जी साबित हुए।
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