होली की ठंडाई में केसर की महंगाई का रंग..

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होली के खास शीतल पेय पर जंग की आंच
ईरान पर हमले के बाद थोक बाजार में दो दिन से भाव नहीं खुले
कौशल मूंदड़ा
उदयपुर, 1 मार्च :
होली से ठीक पहले ठंडाई के स्वाद और रंग पर महंगाई की परत चढ़ती दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़े सैन्य हालात का असर अब स्थानीय बाजार तक महसूस किया जा रहा है। व्यापारियों के अनुसार ईरान से आने वाली केसर के दामों में अचानक तेजी आई है, वहीं गल्फ देशों से आयातित सूखे मेवों के भाव भी ऊपर जा रहे हैं।
स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि करीब दस दिन पहले तक केसर 195 रुपए प्रति ग्राम बिक रही थी, जो दो दिन पहले बढ़कर 215 रुपए प्रति ग्राम हो गई। इसके बाद से थोक बाजार में भाव ही नहीं खुल रहे हैं। भाव नहीं खुलने का अर्थ है कि सप्लायर वर्तमान दर तय नहीं कर पा रहे और नई खेप की कीमत स्पष्ट नहीं है। ऐसे में खुदरा बाजार में उपलब्ध स्टॉक खत्म होते ही दाम और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
व्यापारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है। केसर का प्रमुख उत्पादन ईरान में होता है और भारत में त्योहारी सीजन में इसकी मांग बढ़ जाती है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो होली के बाद भी कीमतों में और उछाल संभव है।
केसर के साथ ही मुनक्का, खारक, पिस्ता, अंजीर और पोस्त दाना के दामों में भी तेजी देखी जा रही है। ये सभी सामग्री ठंडाई के प्रमुख घटक हैं और अधिकांश आयातित हैं। मांग बढ़ने और अनिश्चित आपूर्ति के कारण थोक व्यापारी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
बाजार की नजर अब सोमवार पर टिकी है, जब थोक दरें स्पष्ट होने की उम्मीद है। तब तक होली की मिठास पर महंगाई की हल्की कड़वाहट बनी रह सकती है।
ठंडाई में केसर का महत्व
होली के साथ ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। ठंडाई पारम्परिक शीतल पेय है, जिसमें बादाम, काजू, पिस्ता, मुनक्का, खारक और पोस्त दाना पीसकर मिलाए जाते हैं। केसर इसमें न केवल आकर्षक रंग भरती है, बल्कि सुगंध और स्वाद भी बढ़ाती है। आयुर्वेद में इसे ऊर्जा और ताजगी देने वाला माना गया है।
खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को लेकर चिंता, सांसद सीपी जोशी ने विदेश मंत्री से मांगी मदद
खाड़ी देशों में बिगड़े हालात के बीच दुबई सहित विभिन्न शहरों में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर चिंता बढ़ गई है। चित्तौड़गढ़ के नागरिकों के वहां फंसे होने की सूचना पर सांसद सी.पी. जोशी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से संपर्क कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
दुबई, अबू धाबी और संयुक्त अरब अमीरात के अन्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के अस्थायी रूप से बंद होने से यात्रा, अध्ययन और व्यवसायिक कार्य से गए लोग असमंजस की स्थिति में हैं। माहेश्वरी समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी स्थिति पर चिंता जताई है। समाजों द्वारा स्थानीय स्तर पर हेल्पलाइन नंबर जारी कर वहां निवासरत समाजजनों के माध्यम से आपात सहयोग की व्यवस्था की जा रही है, ताकि जरूरतमंदों को त्वरित सहायता मिल सके।