डीएमएफटी की 47 सड़कें, अधिकांश अधरझूल में
सलूंबर, 4 फरवरी: नवगठित जिला बनने के बाद सलूंबर में विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जगी थी। योजनाओं और घोषणाओं की लंबी सूची भी सामने आई, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में डीएमएफटी फंड से स्वीकृत सड़कों की बदहाल स्थिति विकास के वादों की सच्चाई बयां कर रही है।
वर्ष 2024–25 में डीएमएफटी मद से सलूंबर जिले में 47 ग्रामीण सड़कों के निर्माण को स्वीकृति दी गई थी। निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी के माध्यम से शुरू तो हुआ, लेकिन करीब एक साल बीत जाने के बावजूद अधिकांश सड़कें अधूरी पड़ी हैं। सूत्रों के अनुसार, पहले डीएमएफटी की स्वीकृति उदयपुर से होती थी। जिला बनने के बाद सलूंबर में डीएमएफटी का गठन तो हो गया, लेकिन बजट स्वीकृति की प्रक्रिया अटकने से काम रुक गया।
सिर्फ 9 सड़कों पर डामरीकरण
हालात यह हैं कि 47 में से केवल 9 सड़कों पर ही डामरीकरण पूरा हो सका है। कई जगह सिर्फ गिट्टी डालकर काम छोड़ दिया गया। कहीं निर्माण बीच में ही रोक दिया गया। बजट और भुगतान नहीं मिलने से ठेकेदार फर्मों ने कार्य आगे बढ़ाने में असमर्थता जता दी है।
ग्रामीणों की परेशानी, हादसों का खतरा
अधूरी सड़कों से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बरसात में कीचड़, गर्मी में धूल, और हर मौसम में दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। पीडब्ल्यूडी के अनुसार इन सड़कों का कार्य वर्ष 2025 से पहले पूरा होना था, लेकिन अब तक अधिकांश सड़कों पर अंतिम लेयर तक नहीं डाली जा सकी है।
ठेकेदार संगठन की गुहार, समाधान का इंतजार
पीडब्ल्यूडी ठेकेदार संगठन ने बजट और भुगतान को लेकर जिला कलेक्टर, विधायक और सांसद से कई बार मुलाकात की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। ठेकेदारों का कहना है कि बिना भुगतान और बजट स्वीकृति के काम आगे बढ़ाना संभव नहीं है।
जिम्मेदार माने, भुगतान प्रक्रिया के चलते देरी
पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता मणि लाल मेघवाल ने बताया कि कुछ सड़कों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष कार्य भुगतान में देरी के कारण प्रभावित हुए हैं। विधायक शांता अमृतलाल मीणा ने कहा कि लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और जिला कलेक्टर द्वारा निरीक्षण के बाद भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जिला कलेक्टर अवधेश मीना ने स्पष्ट किया कि सड़कों की गुणवत्ता जांच के बाद ही भुगतान किया जाएगा।