सज गए रंग, लुभा रहीं पिकारियां
उदयपुर, 26 फरवरी: फागुन की मादक बयार के साथ शहर रंगों की रौनक में सराबोर हो उठा है। बाजारों में सजी पिचकारियों की कतारें, अबीर-गुलाल के रंग-बिरंगे ढेर और बच्चों की खिलखिलाहट होली के आगमन का संदेश दे रहे हैं। दुकानों पर सुबह से देर शाम तक खरीदारों की चहल-पहल है तो मंदिरों में फागुन के रसिया गूंज रहे हैं। सामाजिक संस्थाओं में फाग उत्सवों की धूम है और हर ओर उल्लास का रंग घुलता नजर आ रहा है।
इस बार होली दहन की परंपरा पर एक और खास बात नजर आ रही है। होली दहन में परम्परागत रूप से काम आने वाले गोबर से बने वडुलिये, ढाल, कौड़ी की आंख वाली होली माता, नारियल, माताजी की जीभ, सूरज-चांद-तारा-तलवार, पान-सुपारी सहित पूजन सामग्री आकर्षक पैकेज में उपलब्ध है। गौशालाओं में भी वडुलिये तैयार किए जा रहे हैं, जिससे लोगों का रुझान वहां की ओर बढ़ा है। शिव शंकर गौशाला की सचिव शालिनी राजावत कहती हैं कि लकड़ियों के स्थान पर गोबर के कंडे व गरगोलिये (वडुलिये) उपयोग में लेने से पेड़ों की कटाई रोकी जा सकती है और पर्यावरण शुद्ध बना रहता है। परंपरागत रूप से होलिका दहन में नई फसल, सूखा नारियल व हवन सामग्री के साथ गोबर उत्पादों का उपयोग होता आया है। गौशाला में बन रहे वडुलिये लेने के लिए कई लोग आ रहे हैं।
इधर, जनजाति महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही प्राकृतिक हर्बल गुलाल भी पसंद की जा रही है। कई संस्थाएं गणमान्यजनों, कर्मचारियों आदि को उपहार में देने के लिए बड़ी मात्रा में हर्बल गुलाल के ऑर्डर दे रही हैं। सलूंबर जिले के नठारा स्थित वन धन विकास केंद्र से जुड़ी करीब 200 ग्रामीण महिलाएं हर्बल गुलाल तैयार कर खासी आमदनी कमा रही हैं। अब तक ये महिलाएं 250 किलोग्राम गुलाल तैयार कर चुकी हैं।