वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल 2026 का आधिकारिक पोस्टर जारी

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6 से 8 फरवरी तक झीलों के शहर में बजेगा ‘म्यूज़िक विदाउट बॉर्डर्स’ का जादू
उदयपुर, 4 फरवरी:
संगीत प्रेमियों के लिए उदयपुर में एक बार फिर सुरों का महाकुंभ सजने जा रहा है। ‘वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल 2026’ का आयोजन 6 से 8 फरवरी तक होगा, जिसमें देश-विदेश के कलाकार झीलों की नगरी को संगीत के रंगों से सराबोर करेंगे। इस वर्ष फ़ेस्टिवल अपने 10 साल पूरे होने का उत्सव भी मना रहा है।
हिंदुस्तान ज़िंक और सहर ने जारी किया पोस्टर
फ़ेस्टिवल से पहले बुधवार को इसका आधिकारिक पोस्टर जारी किया गया। हर साल की तरह इस बार भी ‘हिंदुस्तान ज़िंक’ मुख्य सहयोगी है, जबकि आयोजन की रूपरेखा ‘सहर’ ने तैयार की है। राजस्थान पर्यटन विभाग का भी इसमें अहम योगदान है।
कैलाश खेर, अमित त्रिवेदी सहित बड़े नाम
इस एडिशन में कैलाश खेर और कैलासा लाइव, अमित त्रिवेदी, जोनिता गांधी, ताबा चाके, अमृत रामनाथ, इंडियन ओशन और OAFF जैसे चर्चित कलाकार प्रस्तुति देंगे।
11 से अधिक देशों के अंतरराष्ट्रीय कलाकार होंगे शामिल
स्पेन, अफ्रीका, यूरोप सहित 11 से अधिक देशों से आए कलाकार भी पहली बार भारत में परफॉर्म करेंगे। तीन दिनों में 20 से ज्यादा बैंड और 150 से अधिक कलाकार मंच पर उतरेंगे। ‘सहर’ के फाउंडर संजीव भार्गव ने कहा कि उदयपुर की ऐतिहासिक लोकेशंस इस फेस्टिवल में खुद संगीत का हिस्सा बन जाती हैं। तैयारियां पूरी हैं और उदयपुर विश्व संगीत के इस उत्सव के स्वागत को तैयार है।

साइलेंस जोन में आयोजन को लेकर एनजीटी के आदेशों की अनदेखी?

फतहसागर किनारे म्यूजिक फेस्टिवल पर सवाल
फतहसागर झील, जिसे ‘इको-सेंसिटिव’ और साइलेंस जोन क्षेत्र माना गया है, वहां वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल के आयोजन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और विभिन्न हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार झील क्षेत्र में किसी भी प्रकार के शोर-शराबे वाले आयोजन प्रतिबंधित हैं।
झील विशेषज्ञ डॉ. अनिल मेहता बनाम राजस्थान सरकार केस में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि फतहसागर झील क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। अदालत ने झील को वन्यजीव अभयारण्य की तर्ज पर ‘इको-सेंसिटिव जोन’ मानते हुए तेज आवाज वाले कार्यक्रमों की अनुमति लगभग नामुमकिन बताई थी।
100 मीटर बफर जोन में आयोजन पर पूरी तरह रोक
एनजीटी ने झील किनारों को बफर जोन घोषित किया है, जिसके तहत 100 मीटर के दायरे में व्यावसायिक गतिविधियां और तेज आवाज वाले आयोजन नहीं किए जा सकते। पर्यावरण संरक्षण को पर्यटन और मनोरंजन से ऊपर मानते हुए अदालतें ऐसे मामलों में भारी जुर्माना या कार्यक्रम रद्द करने तक की कार्रवाई कर सकती हैं। हाल ही में राजस्थान में नियम उल्लंघन पर अधिकारियों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
आयोजकों का दावा—प्रशासन से अनुमति
हालांकि, फेस्टिवल आयोजक संस्था ‘सहर’ के फाउंडर संजीव भार्गव का कहना है कि कार्यक्रम प्रशासन की अनुमति से आयोजित किया जा रहा है।
हालांकि बड़ा सवाल यह है कि जब फतहसागर क्षेत्र में एनजीटी की सख्त रोक है, तो फिर इस तरह के म्यूजिक फेस्टिवल को मंजूरी किस तरह मिली?