अफीम की फसल की सीसीटीवी से निगरानी

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खराबे से ज्यादा तस्करों का डर
चित्तौड़गढ़, 8 फरवरी
: चित्तौड़गढ़ जिले में अफीम की खेती करने वाले किसान इन दिनों मौसम से ज्यादा तस्करों और पक्षियों के खतरे से परेशान हैं। जिस फसल को किसान “काला सोना” कहते हैं, उसकी सुरक्षा के लिए अब खेतों में जाल, तारबंदी और यहां तक कि CCTV कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। डोडे आते ही अफीम की फसल पर चोरी का डर बढ़ जाता है, इसलिए किसान रात-रात भर चौकीदारी करने को मजबूर हैं।
अफीम चित्तौड़गढ़ की रबी की मुख्य नकद फसल मानी जाती है। जिले के 1010 गांवों में 21 हजार 736 किसान इस बार 1930.51 हेक्टेयर क्षेत्र में अफीम की खेती कर रहे हैं। किसान बताते हैं कि थोड़ी सी लापरवाही कई महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकती है।
किसानों का कहना है कि पहले नुकसान का खतरा केवल मौसम और कीटों से था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं। डोडे कीमती होते हैं और तस्करों की नजर हमेशा फसल पर रहती है।इस बार अचानक बारिश और तेज हवा से पौधों को नुकसान होने की आशंका है। पौधों को गिरने से बचाने के लिए किसान मेढ़ बनाकर सहारा दे रहे हैं। कीड़े-मकोड़ों से बचाव के लिए खेतों में पीले प्लास्टिक लटकाए जाते हैं, जिन पर गम लगाया जाता है। कीट उसमें चिपक जाते हैं और फसल सुरक्षित रहती है।


पक्षी एक बार चख लें तो रोज लौटते हैं
तोता, तीतर और बटेर जैसे पक्षी भी अफीम के डोडों को नुकसान पहुंचाते हैं। एक बार चखने के बाद वे बार-बार खेत में मंडराने लगते हैं। इसलिए किसान अब खेतों के ऊपर जाल लगवा रहे हैं।कई किसानों ने अब खेतों में CCTV कैमरे लगवा दिए हैं, जिनका कनेक्शन मोबाइल से होता है। इससे किसान घर बैठे भी निगरानी कर सकते हैं और चोरी की घटनाओं में कमी आई है। 15 फरवरी से डोडे पर चीरा लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इससे पहले किसान दुर्ग स्थित कालिका माता मंदिर में दर्शन कर खेतों में पूजा करते हैं।