ओस्लो, 10 अक्टूबर: वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो को शांति का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। मचाडो ने वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही के दौर में लोकतंत्र की दिशा में शांतिपूर्ण बदलाव लाने के लिए पिछले 20 वर्षों से संघर्ष किया है। नोबेल कमेटी ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में तानाशाही बढ़ रही है और लोकतंत्र कमजोर हो रहा है, ऐसे साहसी नेताओं का सम्मान करना जरूरी है। कमेटी ने यह भी बताया कि लोकतंत्र ही स्थायी शांति की शर्त है, और सत्ता द्वारा हिंसा और डर के माध्यम से जनता को दबाने के प्रयासों के खिलाफ लड़ने वाले लोगों की हिम्मत प्रेरणादायक है।
मचाडो ने सुमाते संगठन की स्थापना की, जो लोकतंत्र और स्वतंत्र चुनावों के लिए काम करता है। उन्होंने वेनेजुएला में मुफ्त और निष्पक्ष चुनावों की लगातार मांग की। पुरस्कार जीतने के बाद मचाडो ने इसे वेनेजुएला के लोगों और डोनाल्ड ट्रम्प को समर्पित किया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह पुरस्कार वेनेजुएला की आजादी की लड़ाई को मान्यता देता है और लोकतांत्रिक देशों का समर्थन महत्वपूर्ण है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बीते कई महीनों से नोबेल पीस प्राइज के दावेदार रहे, लेकिन नोबेल कमेटी ने उन्हें इस बार सम्मान नहीं दिया। इस निर्णय के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नाराजगी जताई और कहा कि ट्रम्प दुनिया में शांति के लिए कई प्रयास कर रहे हैं। पुतिन ने कमेटी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार पुरस्कार उन लोगों को दिया गया, जिन्होंने वास्तविक शांति के प्रयास नहीं किए।
नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में 10 दिसंबर को यह पुरस्कार प्रस्तुत किया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन ने भी नोबेल कमेटी पर पक्षपात का आरोप लगाया और कहा कि कमेटी ने राजनीति को शांति से प्राथमिकता दी है।
मारिया मचाडो की जीत से वेनेजुएला और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में लोकतंत्र और शांति के समर्थकों को प्रोत्साहन मिला है। उनका कहना है कि वेनेजुएला की जनता जीत के करीब है और उन्हें अमेरिका, लैटिन अमेरिका और अन्य लोकतांत्रिक देशों का समर्थन चाहिए। नोबेल पुरस्कार उन्हें वैश्विक मंच पर मान्यता और प्रेरणा देने वाला साबित होगा।