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बजट 2026: कैंसर की 17 दवाएं सस्ती, EV-सोलर होंगे किफायती; शराब और ट्रेडिंग महंगी

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बजट 2026: कैंसर की 17 दवाएं सस्ती, EV-सोलर होंगे किफायती; शराब और ट्रेडिंग महंगी

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नई दिल्ली, 1 फरवरी : केंद्रीय बजट 2026 में आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत और कुछ क्षेत्रों में अतिरिक्त बोझ दोनों देखने को मिले हैं। सरकार ने जहां कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को सस्ता कर मरीजों को राहत दी है, वहीं शराब और शेयर ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ाकर महंगाई का संकेत दिया है।
क्या हुआ सस्ता
सरकार ने कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली 17 जीवनरक्षक दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी है। साथ ही 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाओं और विशेष आहार पर भी टैक्स छूट दी गई है।
EV बैटरी और सोलर पैनल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल को टैक्स फ्री किया गया है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन और सौर ऊर्जा उत्पाद सस्ते हो सकते हैं।
माइक्रोवेव ओवन के पुर्जों पर ड्यूटी घटने से इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते होने की उम्मीद है।
विदेश यात्रा के टूर पैकेज पर TCS घटाकर 2% कर दिया गया है।
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस और पर्सनल इम्पोर्ट पर भी टैक्स में कटौती की गई है।
क्या होगा महंगा
शराब पर TCS 1% से बढ़ाकर 2% कर दिया गया है।
फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT बढ़ने से शेयर बाजार में सौदे महंगे होंगे।
कुल मिलाकर बजट में स्वास्थ्य और हरित ऊर्जा को बढ़ावा, जबकि राजस्व बढ़ाने के लिए कुछ क्षेत्रों में सख्ती दिखाई देती है।

  1. स्थिर अर्थव्यवस्था के चलते बैलेंस बजट आया
    हर बार बजट में उम्मीद की जाती है कि कोई बड़ा ऐलान या योजना शुरू हो, लेकिन इस बार ऐसा कुछ खास नहीं हुआ।
    दरअसल, जब स्टेबल इकोनॉमी यानी स्थिर अर्थव्यवस्था होती है तो बजट में सरकार कोई बड़े ऐलान नहीं करती है।
    भारत की इकोनॉमी 7% से ज्यादा की दर से ग्रो कर रही है और स्थिर है। वहीं पिछले साल 12 लाख तक की कमाई टैक्स फ्री की गई थी, जिससे मिडिल क्लास और नौकरीपेशा वालों को फायदा हुआ।
    बड़े ऐलान नहीं करने के बाद भी बजट साइज बढ़ा है। पिछले साल के मुकाबले 7.1% की बढ़ोतरी के साथ इस बार 53.47 लाख करोड़ का बजट आया है।
    सरकार ने इकोनॉमी को स्थिर रखने, लोगों की अपेक्षा और उनके खर्च करने की हैसियत बढ़ाने पर फोकस किया है।
  2. टैक्स पेयर को कोई छूट क्यों नहीं?
    डिफेंस बजट बढ़ाया गया है। कई योजनाएं अनाउंस की गई लेकिन टैक्स पेयर्स के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं हुई। सरकार के पास अभी टैक्स छूट देने जरूरी स्पेस नहीं रहा होगा।
    सरकार ने यह जरूर कहा है कि अप्रैल 2026 से टैक्स से जुड़े नियम आसान होने जा रहे हैं। इससे मिडिल क्लास और रिटायर्ड लोगों की उम्मीदों को झटका लगा है।
    लोगों को यह भी उम्मीद थी की फिक्स्ड डिपोजिट यानी FD की ब्याज पर लगने वाला टैक्स कम हो, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अभी बैंकों में FD कम हो रही है, क्योंकि इसके ब्याज पर 30% से ज्यादा टैक्स लगता है।
    ऐसे में लोग म्यूचल फंड और इक्विटी में ज्यादा निवेश कर रहे हैं। लोगों को उम्मीद थी कि इसमें बदलाव हो लेकिन किसी वजह से इसे मुद्दे को एड्रेस नहीं किया गया।
  3. रिटर्न फाइल करने और बदलने का ज्यादा समय मिलेगा
    इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने की डेट में थोड़ा बदलाव हुआ है। ITR-1 और ITR-2 फाइल करने वाले पहले की तरह ही 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल कर सकेंगे। ITR-3 और ITR-4 वालों के लिए सीमा 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई है।
    इनकम टैक्स रिटर्न को रिवाइज करने की सीमा 31 दिसंबर से बढ़कर 31 मार्च कर दी गई है। हालांकि 31 दिसंबर के बाद ऐसा करने पर कुछ एक्स्ट्रा फीस देने होगी।
    अगर इनकम 5 लाख से कम है तो 1000 रुपए और 5 लाख से ज्यादा है तो 5 हजार की फीस होगी। इस बदलाव से टैक्सपेयर को गलती सुधारने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
    ईमानदार टैक्सपेयर को टैक्स डिसप्यूट सेटल करने का आसान रास्ता दिया गया है। इसमें पेनल्टी की जगह अतिरिक्त राशि देकर मामला बंद किया जा सकता है। इससे लंबी कानूनी लड़ाई से राहत मिलेगी।
  4. गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स छूट 5 के बजाय 8 साल बाद
    बजट में एक और बदलाव सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में हुआ है। यह बॉन्ड भारत सरकार की तरफ से जारी किए जाने वाले एक तरह के डिजिटल बॉन्ड होते हैं। जरूरत पड़ने पर इनके बदले कैश लिया जा सकता है। चाहे मार्केट से खरीदा हुआ बॉन्ड हो या खुद सब्सक्राइब किया हुआ।
    इन्वेस्टर्स पहले गोल्ड बॉन्ड 5 साल में रिजर्व बैंक यानी RBI से रिडीम करवा सकते थे। इस पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता था।
    लेकिन अब टैक्स में छूट 8 साल का मैच्योरिटी पीरियड खत्म होने पर ही मिलेगी। छूट उन्हीं निवेशकों को मिलेगी, जिन्होंने खुद गोल्ड बॉन्ड सब्सक्राइब किए थे, न कि उन्हें जिन्होंने इसे मार्केट से खरीदा हो।
  5. सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स बढ़ने से मार्केट में गिरावट
    डेरिवेटव ट्रेडिंग यानी भविष्य में दूसरी चीजों के दाम कितने बढ़ेंगे, इस पर निवेश करने पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स यानी STT भरना होता है। बजट में STT बढ़ गया है।
    दरअसल, डेरिवेटिव ट्रेडिंग करने वाले 90% ट्रेडर्स को नुकसान होता है। ऐसे में सरकार ने फ्यूचर कॉन्ट्रेक्ट्स पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% कर दी है, जबकि ऑप्शन्स प्रीमियम पर STT 0.10% से बढ़ाकर 0.15% कर दी है।
    इससे ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी। शॉर्ट टर्म और लगातार निवेश करने वालों पर इसका नेगेटिव असर पड़ेगा।
    जब बजट में इसकी घोषणा हो रही थी, तब स्टॉक मार्केट में गिरावट आई। 1 फरवरी को सेंसेक्स 1546 अंक यानी करीब 2% गिरा जबकि निफ्टी 495 अंक टूटा।
  6. सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ कॉरिडोर आत्मनिर्भरता की ओर कदम
    पिछले साल के मुकाबले इस बार बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत खर्च में 1 लाख करोड़ का इजाफा किया है।
    इस पर 2026-27 में 12.25 लाख करोड़ रुपए होंगे, जो कुल बजट का 22.8% है। केंद्र सरकार पिछले 5 साल से लगातार कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ा रही है।
    कैपिटल एक्सपेंडिचर से देश में इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, हाईवे, एसेट्स वगैरह बनाए जाते हैं, जिनसे रोजगार और व्यापार के नए मौके तैयार होते हैं।
    वहीं इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के लिए 40 हजार करोड़ की नई स्कीम लाई गई। इसमें सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट ‘ISM 2.0’ शामिल है। अभी 90% सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन ताइवान में होता है।
    इसके अलावा ओडिशा, केरल, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ मिनरल्स कॉरिडोर बनाने की घोषणा हुई। अभी पूरी दुनिया रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए चीन पर निर्भर है।
    बजट से साफ हो चुका है कि भारत सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए ताइवान और चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है और आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है।
  7. विदेशी निवेश बढ़ने से स्टॉक मार्केट स्टेबल होगा
    पर्सन रेसिडेंट आउटसाइड इंडिया यानी PROI अब भारतीय लिस्टेड कंपनियों में अप्रूव्ड रूट के जरिये निवेश कर सकते हैं।
    इससे भारतीय स्टॉक मार्केट में विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना है। मार्केट की लिक्विडिटी बेहतर होगी और लॉन्ग टर्म में इक्विटी इंवेस्टर्स के लिए माहौल ज्यादा स्टेबल और पॉजिटिव बन सकता है।
  8. कैंसर का इलाज सस्ता होगा
    कैंसर पेशेंट्स के लिए 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूट हटा दी गई है। इससे कुछ जरूरी कैंसर दवाएं सस्ती हो सकती हैं। कैंसर इलाज का ओवरऑल खर्च भी कम होने की उम्मीद है।

अन्य खास बातें…
गाड़ी चलाते हुए एक्सिडेंट होने पर मोटर एक्सिडेंट क्लैम ट्रिब्यूनल से मुआवजा देता है। के इस पर मिलने वाले इंट्रेस्ट पर अब इनकम टैक्स नहीं देना होगा और ना ही कोई TDS काटा जाएगा। एक्सिडेंट विक्टिम और उनके परिवारों को इंट्रेस्ट की पूरी रकम बिना टैक्स कटे मिलेगी।
ओवरसीज टूर पैकेज और LSR के तहत शिक्षा और इलाज के मकसद से भेजी जाने वाली पर TCS घटाकर 2% हो गया है। इससे कैश ब्लॉकेज कम होगा और बाद में ITR में रिफंड क्लैम करने की डिपेंडेंसी घटेगी।
शेयर बायबैक पर अब डिविडेंट इनकम की जगह कैपिटल गेन्स के तौर पर टैक्स लगेगा। प्रमोटर्स पर एडिशनल बायबैक टैक्स लगेगा। पहले बायबैक की पूरी रकम इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती थी, जो रिटेल इंवेस्टर के लिए नुकसानदायक था।

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